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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

मैं नहीं जानता इस सन्यासी ने कभी सोचा था या नहीं कि उसकी मृत्यु पर कोई रोएगा लेकिन उस क्षण रोने वालों की कमी नहीं थी। (नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है।) इस तरह हमारे बीच से वह चला गया जो हममें से सबसे अधिक छायादार फल-फूल गंध से भरा और सबसे अलग, सबका होकर, सबसे ऊँचाई पर, मानवीय करुणा की दिव्य चमक में लहलहाता खड़ा था। जिसकी स्मृति हम सबके मन में (जो उनके निकट थे) किसी यज्ञ की पवित्र आग की आँच की तरह आजीवन बनी रहेगी। मैं उस पवित्र ज्योति की याद में श्रद्धानत हूँ।


(1) नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है ‘ऐसा लेखक ने क्यों कहा?


(2) लेखक ने फ़ादर के लिए किन-किन विशेषणों का प्रयोग किया है और क्यों?


(3) गद्यांश में फ़ादर की स्मृति को किसके समान बताया गया है?

(1) फादर के अंतिम संस्कार के समय लेखक ने देखा कि वहां मौजूद साहित्यकार, विद्वान और ईसाई समुदाय के लोग रो रहे थे। सभी को रोता हुआ देख खुद के आंसू आना लाजमी है। एक को देख दूसरा भी भावुक हो उठता है। इसी फैलाव के चलते लेखक ने कहा है कि नम आंखों को गिनना स्याही फैलाना है।


(2) लेखक ने फादर के लिए छायादार फल-फूल गंध से भरा और सबसे अलग, सबका होकर, सबसे ऊँचाई पर, मानवीय करुणा की दिव्य चमक जैसे विशेषणों का प्रयोग किया है। इन विशेषणों को प्रयोग करने के पीछे फादर के स्वभाव की विभिन्न विशेषताएँ जैसे सभी के प्रति फादर का वात्सल्य भाव, प्रेम, करुणा, आत्मीयता आदि हैं।


(3) इस गद्यांश में फादर की स्मृति को यज्ञ की एक पवित्र ज्योति के समान बताया गया है। जिसके आगे लेखक श्रद्धानत अथवा नतमस्तक है।


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निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं चार वाक्यों के रखांकित पदों का पद—परिचय दीजिये (कोई चार)

(1) सूर्योदय हुआ और पक्षी चाहचाहने लगे।


(2) वीर पुरुषों का सर्वत्र आदर किया जाता है।


(3) अध्यापिका ने बच्चों को एक कहानी सुनाई।


(4) अवनि कल आएगी।


(5) इलाहाबाद में तीन नदियों का संगम है।

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निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए –

(1) ‘वीर’ रस का एक उदाहरण लिखिए।


(2) निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में रस पहचान कर लिखिए-


एक ओर अजगरहि लखि, एक ओर मृगराय।


विकल बटोही बीच ही परयो मूरछा खाय||


(3)‘निर्वेद’ किस रस का स्थायी भाव है?


(4) करुण रस का स्थायी भाव क्या है?


(5) घृणित वस्तुओं को देखकर अथवा उनके बारे में सुनकर मन में जो भाव उत्पन्न होता है, उससे किस रस की व्युत्पत्ति होती है?

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निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्ही चार प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए-

(1) हालदार साहब के लिए कौन-सा कौतूहल दुर्दमनीय हो उठा, जिसे पानवाले से पूछे बिना नहीं रह सके?


(2) बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?


(3) लेखिका मन्नू भंडारी अपने ही घर में हीन भावना का शिकार क्यों हो गई?


(4) उस्ताद बिस्मिल्ला खां काशी छोड़कर अन्यत्र क्यों नहीं जाना चाहते थे?


(5) नवाब साहब खीरा खाने के अपने ढंग के माध्यम से क्या दिखाना चाहते थे?

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निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।


अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।


पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।


ज्यों जल माहँ तेल की गागरि, बूंद न ताकौं लागी।


प्रीती-नदी मैं पोऊ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी।


सूरदास’ अबला हम भोरी, गुर चांटी ज्यौं पागी||


(1) गोपियों ने क्या कहकर उद्धव पर व्यंग्य किया है?


(2) गोपियों ने उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की है और क्यों?


(3) गोपियों ने अपनी तुलना गुड़ से लिपटी चीटियों से क्यों की है?