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निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

अपने नहीं अभाव मिटा पाया जीवन भर


पर औरों के सभी अभाव मिटा सकता हूँ।


तूफानों-भूचालों की भयप्रद छाया में,


मैं ही एक अकेला हूँ जो गा सकता हूँ।


मेरे ‘मैं’ की संज्ञा भी इतनी व्यापक है,


इसमें मुझ-से अगणित प्राणी आ जाते हैं।


मुझको अपने पर अदम्य विश्वास रहा है।


मैं खंडहर को फिर से महल बना सकता हूँ।


जब-जब भी मैंने खंडहर आबाद किए हैं,


प्रलय-मेघ भूचाल देख मुझको शरमाए।


मैं मजदूर मुझे देवों की बस्ती से क्या,


मैंने अगणित बार धरा पर स्वर्ग बनाए।


(1) उपर्युक्त काव्य-पंक्तियों में किसका महत्व प्रतिपादित किया गया है?


(2) स्वर्ग के प्रति मजदूर की विरक्ति का क्या कारण है?


(3) किन कठिन परिस्थितियों में भी मजदूर ने अपनी निर्भयता प्रकट की है?


(4) मेरे ‘मैं’ की संज्ञा भी इतनी व्यापक है इसमें मुझ-से अगणित प्राणी आ जाते हैं।


(5) अपनी शक्ति और क्षमता के प्रति मजदूर ने क्या कहकर अपना आत्म-विश्वास प्रकट किया है?


अथवा


हँसते खिलखिलाते रंग-बिरंगे फूल क्यारी में देखकर


जी तृप्त हो गया।


नथुनों से प्राणों तक खिंच गई


गंध की लकीर सी


आँखों में हो गई रंगों की बरसात


अनायास कह उठा


वाह !


धन्य है वसंत ऋतु।


लौटने को पैर ज्यों बढ़ाये तो


क्यारी के कोने में दुबका एक नन्हा फूल अचानक बोल पड़ा:


सुनो


एक छोटा-सा सत्य तुम्हें सौंपता हूँ


धन्य है वसंत ऋतु, ठीक है


पर उसकी धन्यता उसकी कमाई नहीं


वह हमने रची है,


हमने


यानी मैंने


मुझ जैसे मेरे अनगिनत साथियों ने-


जिन्होंने इस क्यारी में अपने-अपने ठाँव पर


धूप और बरसात,


जाड़ा, और पाला झेल


सूरज को तपा है पूरी आयु एक पाँव पर


तुमने ऋतु को बखाना,


पर क्या कभी पल भर भी


तुम उस लौ को भी देख सके


जिसके बल


मैंने और इसने और उसने


यानी मेरे एक-एक साथी ने


मिट्टी का अँधेरा फोड़


सूरज से आँखें मिलाई हैं?


उसे यदि जानते तो तुमसे भी


रंग जाती के ऋतु।


(1) फूल ने कवि को कौन-सा छोटा-सा सत्य सौंपा?


(2) वसंत की धन्यता को किसने रचा है?


(3) फूल और उसके साथियों ने मिट्टी का अँधेरा फोड़कर किससे आँखें मिलाई हैं?


(4) फूलों और उसके जैसे अनगिनत साथियों ने क्या किया है?


(5) हँसते खिलखिलाते फूलों को देख कवि को क्या अनुभव हुआ?

(1) इन पंक्तियों में मजदूर का महत्व बताया है। मजदूर के पास इतनी शक्ति है कि वह अपने कर्म और परिश्रम से धरा पर स्वर्ग बना सकता है।


(2) मजदूर इस धरा पर घर बनाता है। वो कह रहा है कि मुझे देवताओं की बस्ती से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि वो स्वयं कई बार धरा पर स्वर्ग बना सकता है।


(3) मजदूर ने प्रलय, भूचाल और मेघ से अपनी निर्भयता प्रकट की है क्योंकि वो खंडहर को भी आबाद कर सकता है।


(4) इस पंक्ति में ‘मैं’ शब्द मजदूर को संबोधित कर रहा है। कवि कहना चाहता है कि मजदूर कहने भर से दुनिया के सभी क्रियाशील प्राणी इसमें आ जाते हैं।


(5) मजदूर ने अपने आत्मविश्वास को ये कहकर प्रकट किया है कि वो खंहडर को भी आबाद कर सकता है। उसके सामने बादल, प्रलय और भूचाल भी झुक जाते हैं।


अथवा


(1) फूल ने कवि से कहा है कि तुमने ऋतु के बारे में इतना कुछ लिखा क्या कभी हमें देखा है। हम फूलों ने ही कड़ी धूप, छांव, बरसात, जाड़ा और पाला झेला है। हम फूलों के कारण ही ये क्यारी सुंदर नजर आ रही है।


(2) वसंत की धन्यता अनगिनत फूलों से है।


(3) फूल ने कवि से कहा है कि उसने और उसके साथियों ने मिट्टी का अंधेरा फोड़ सूरज से आंखें मिलाई हैं।


(4) फूलों और उसके अनगिनत साथियों ने धूप, जाड़ा, पाला और बरसात झेली है।


(5) हंसते खिलखिलाते फूलों को देख कवि का मन तृप्त हो गया। शरीर में जैसे प्राण आ गए हों। खुशबू से मन खुश हो गया। रंग-बिरंगे फूलों को देख मन प्रसन्न हो गया।


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निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए –

सृष्टि ने मानव को जो सर्वश्रेष्ठ वरदान दिए हैं उनमें से एक महत्वपूर्ण वरदान है – स्वस्थ शरीर । स्वस्थ शरीर से ही जिंदगी की सही शुरुआत होती है। अस्वस्थ शरीर में कहाँ जीवन होता है? वह तो जीवन पर बोझ होता है। जीवन के सभी सुख, सौंदर्य, सभी आनंद स्वस्थ होने पर ही मिलते हैं। स्वास्स्थ्य सभी जीवधारियों के आनंदमय जीवन की कुंजी है; क्योंकि स्वास्थ्य के बिना जीवधारियों की समस्त क्रियाएँ-प्रक्रियाएं रुक जाती हैं या शिथिल हो जाती हैं। जीवन को जल भी इसलिए कहा जाता है। जिस प्रकार रुका जल सड़ जाता है, दुर्गन्धयुक्त हो जाता है, ठीक इसी प्रकार शिथिल और कर्महीन जीवन से स्वास्थ्य खो जाता है। स्वास्थ्य और खेल-कूद का परस्पर गहरा संबंध है। पशु-पक्षी हो या मनुष्य, जो खेलता-कूदता नहीं, वह उत्फुल्ल और प्रसन्न रह नहीं सकता। जब हम खेलते हैं तो हममें नया प्रणावेग, नई स्फूर्ति और नई चेतना आ जाती है। हम देखते हैं कि हवा के झोंके एक-दूसरे का पीछा करते हुए दूर-दूर तक दौड़ते हैं, वृक्षों की शाखाओं को हिला-हिलाकर अठखेलियाँ करते हैं। आकाश में उड़ते पक्षी तरह-तरह की क्रीडाएं करते हैं। हमें भी जीवन-जगत से प्रेरणा लेते हुए खुले मन से खेल-कूद में भाग लेना चाहिए।


(क) स्वास्थ्य और खेल-कूद परस्पर एक दूसरे के पूरक हैं -कैसे?


(ख) उदाहरण देते हुए सिद्ध कीजिए की प्रकृति भी खेल-कूद पसंद करती है।


(ग) स्वास्थ्य का कर्म से क्या संबंध है?


(घ) जीवन को जल क्यों कहा गया है?


(ङ) उपर्युक्त गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक लिखिए।

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निर्देशानुसार किन्हीं तीन का उत्तर लिखिए –

(1) युवा धनुर्धर को सेनापति ने युद्ध में भेजा।


(मिश्र वाक्य में बदलिए)


(2) मैं विद्यालय पहुँचा परंतु घंटी बज चुकी थी।


(सरल वाक्य में बदलिए)


(3) जो मन लगाकर काम करते हैं, उन्हें सफलता मिलती है।


(आश्रित उपवाक्य छांटकर भेद भी लिखिए)


(4) मेरी माँ चाहती हैं कि मैं अच्छा इंसान बनूँ।


(रेखांकित उपवाक्य का भेद लिखिए)

4

निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं चार वाक्यों का निर्देशानुसार वाच्य परिवर्तन कीजिए-

(1) मोहन से पैदल चला नहीं जाता। (कर्तृवाच्य में बदलिए)


(2) आओ, वहाँ बैठे। (भाववाच्य में बदलिए)


(3) किसना खेतों में बीज बोता है। (कर्मवाच्य में बदलिए)


(4) छात्रों द्वारा पाठ याद किया जाता है। (कर्तृवाच्य में बदलिए)


(5) पक्षी आकाश में उड़ेंगे। (कर्मवाच्य में बदलिए)

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निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं चार वाक्यों के रखांकित पदों का पद—परिचय दीजिये (कोई चार)

(1) सूर्योदय हुआ और पक्षी चाहचाहने लगे।


(2) वीर पुरुषों का सर्वत्र आदर किया जाता है।


(3) अध्यापिका ने बच्चों को एक कहानी सुनाई।


(4) अवनि कल आएगी।


(5) इलाहाबाद में तीन नदियों का संगम है।