निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
ऊधौ, तुम हौ अति बड़भागी।
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।
ज्यों जल माहँ तेल की गागरि, बूंद न ताकौं लागी।
प्रीती-नदी मैं पोऊ न बोरयौ, दृष्टि न रूप परागी।
‘सूरदास’ अबला हम भोरी, गुर चांटी ज्यौं पागी||
(1) गोपियों ने क्या कहकर उद्धव पर व्यंग्य किया है?
(2) गोपियों ने उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की है और क्यों?
(3) गोपियों ने अपनी तुलना गुड़ से लिपटी चीटियों से क्यों की है?
(1) गोपियों ने उद्धव को ‘बड़भागी’ कहकर उद्धव पर व्यंग्य किया है। वे उद्धव को प्रेमहीन बताकर उन पर व्यंग्य करती हैं साथ ही उन्होंने उद्धव को बहुत भाग्यशाली कहा है क्योंकि वो प्रेम के बंधन से मुक्त है।
(2) गोपियों ने उद्धव की तुलना कमल के फूल और तेल की मटकी से की है। क्योंकि श्रीकृष्ण के पास रहते हुए भी उद्धव पर प्रेम का रंग नहीं चढ़ा है। उद्धव, श्रीकृष्ण के प्रभाव से सदा मुक्त रहते हैं यह वैसा ही है जैसे पानी में डूबा पत्ता गीला नहीं होता और तेल लगी मटकी भी पानी से भारी होने के वावजूद गीली नहीं होती।
(3) गोपियां श्रीकृष्ण से अनंत प्यार करती हैं और उनके बिना एक पल भी रह नहीं पाती है। गोपियों ने अपनी तुलना गुड़ से लिपटी चीटियों से की है जैसे चींटी गुड़ पर चिपक जाती और फिर कभी छूट नहीं पाती है वहीं प्राण त्याग देती है। गोपियों की हालत भी कुछ ऐसी ही है। वे श्रीकृष्ण प्रेम में पप्राण त्यागने को तैयार हैं लेकिन उनके प्रेम को छोड़ना नहीं चाहती। इसी कारण से गोपियों ने अपनी तुलना गुण से लिपटी चीटियों से की हैं क्योंकि दोनों की हालत लगभग एक जैसी है।
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