निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) लेखक ने व्यावहारिकता को समाज के लिए अच्छा क्यों नहीं माना?
(ख) समुद्र के गुस्से की वजह क्या थी? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला?
(ग) तँतारा की तलवार के बारे में लोगों की क्या राय थी?
अथवा
कौंसिल की ओर से क्या नोटिस निकला?
(क) व्यवहारवादी लोग हमेशा चतुर रहते हैं। प्रत्येक काम में लाभ तथा हानि का गणित लगाने में तत्पर रहते हैं। वे स्थाई रूप से आगे नहीं बढ़ पाते। इतना अधिक गणित लगाकर जीवन जीना उन्हें स्वार्थी बना देता है जबकि ज़्यादातर स्वार्थी लोग स्वयं को इन्हीं गुणों के आधार पर व्यवहारिक घोषित कर देते हैंI इसी कारण से समाज का स्तर गिरता जा रहा है क्योंकि वे व्यावहारिक लोग न तो इस बारे में सोच पाते हैं और न ही विकास के पथ पर चल पाते हैं। इसलिए लेखक ने व्यवहारिकता को समाज के लिए उचित नहीं माना है|
(ख) समुद्र को धीरे-धीरे पीछे धकेल कर बड़े अमीर बिल्डर उसकी जमीन पर लंबी-लंबी इमारतें बनाते जा रहे थे। समुद्र को गुस्सा आ गया क्योंकि इन बिल्डरों ने समुंद्र की संपूर्ण जगह पर अधिकार करना चाहा और समुद्र के लिए स्थान नहीं छोड़ा| इन लालची बिल्डरों की वजह से समुद्र को लगातार पीछे जाना पद रहा था इसी कारण से समुद्र को गुस्सा आया| एक रात तीन समुद्री जहाजों को समुंद्र अपने गुस्से के कारण उठाकर तीन अलग अलग दिशाओं में फेंक दिया। एक जहाज वर्ली के समुद्र के किनारे पर आकर गिरा, दूसरा कार्टर रोड के सामने गिरा और तीसरा गेटवे ऑफ इंडिया पर गिरकर बुरी तरह टूट गया। इस प्रकार समुद्र ने गुस्से को प्रकट करके बिल्डरों को अंतिम चेतावनी दी।
(ग) तताँरा इसका प्रयोग सबके सामने नहीं करता था। लोगों का मानना था कि उसमे अद्भुत दैवीय शक्ति थी। तताँरा की तलवार लकड़ी की थी औऱ हर समय तताँरा की कमर पर बँधी रहती थी। वास्तव में वह तलवार एक विलक्षण रहस्य थी।
अथवा
यह भारत के ब्रिटिश शासन के खिलाफ स्वतंत्रता की लड़ाई का दौर था| इसी दौरान कलकत्ता में कौसिल की ओर से यह नोटिस जारी किया गया कि ठीक चार बजकर चौबीस मिनट पर मोनुमेंट के नीचे स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी और झंडा भी फहराया जाएगा।
ऐसा ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध दर्ज करने के लिए किया गया था|
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