‘हरिहर काका’ पाठ के आधार पर बताइए कि धर्म के नाम पर किस तरह साधारण जन की भावनाओं से खेला जाता है?
अथवा
विद्यार्थियों को अनुशासन में रहने के लिए पाठ ‘सपनों के से दिन’ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में विचार प्रकट कीजिए|
समाज के भटके हुए लोगों को सही रास्ता दिखाना साधुओं का काम होता है।
जो सही है उसे बताना और जो गलत है उसे अपनी गलती समझाकर उसे सुधारना यह साधुओं का कार्य हैं। परंतु हरिहर काका में महंत जी बहुत स्वार्थी थे। वे हरिहर काका से बहुत बुरा व्यवहार करते थे। कहानी के महंत की तरह हमारे समाज में भी कुछ महंत ऐसे ही हैं जो लोगो को धर्म के नाम पर लूटते हैं। संपत्ति हथियाकर बड़े आश्रम बनाते हैं। मंदिरों को धर्म के नाम पर व्यवसाय बनाते हैं। धर्म के नाम पर सीधे– सादे गाँव के लोगों को ठाकुरवारी के नाम पर बेवकूफ बनाना यह आम बात हो चुकी है। इसी प्रकार से वर्तमान में भी अनेक संत आम, भोले-भाले नागरिकों की भावनाओं से खिलवाड़ करते हैं|
अथवा
प्रस्तुत पाठ में विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए कठोर दंड, मार-पीट जैसी युक्तियाँ भी अपनाई गई हैं। पिटाई भी इस प्रकार की होती थी की चमड़ी उधेड़ दी जाए लेकिन वर्तमान में शिक्षण का परिदृश्य बदल गया है| आजकल बच्चों के मनोविज्ञान को समझने के लिए शिक्षकों को परिक्षण दिया जाता है कि वे बच्चे की भावनाओं, उनके दुर्व्यवहार को समझें और उन्हें उनकी गलती का एहसास कराकर उन्हें सुधारने का प्रयास करें| वर्तमान परिवेश में शिक्षकों को बच्चों के साथ मारपीट का अधिकार नहीं दिया गया है। साथ ही वर्तमान शिक्षा प्रणाली में शिक्षकों को बच्चों के साथ मित्रतावत व्यवहार करने की बात की गयी है|
Couldn't generate an explanation.
Generated by AI. May contain inaccuracies — always verify with your textbook.