निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(क) बिहारी के दोहों के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि सच्चे मन में ईश्वर बसते हैं?
(ख) ‘सर पर कफन बाँधना’ किस ओर संकेत करता है?
(ग) कवि ने तालाब की समानता किससे की है?
अथवा
मीरा श्रीकृष्ण के समीप रहने के लिए क्या करने को तैयार है?
(क) बिहारी जी के अनुसार सच्चे मन में ईश्वर बसते हैं। भक्ति का सच्चा रूप हृदय की सच्चाई में निहित है। बिहारी जी ईश्वर प्राप्ति के लिए धर्म कर्मकांड को दिखावा समझते थे। कच्चे मन वाले व्यर्थ में ही नाचते है। माला जपने, छापे लगवाना, माथे पर तिलक लगवाने से प्रभु नहीं मिलते। प्रभु तो ऊनकी सच्ची भक्ति करने से मिलते हैं| आडंबर फ़ालतू के रीति रिवाज आदि से ईश्वर नहीं मिलता|
(ख) इस पंक्ति में सर पर कफन बांधना का तात्पर्य है कि यदि मृत्यु भी आए तो भी वे घबराए ना| पंक्ति में देश की रक्षा के लिए देशवासियों को अपने प्राणों तक का बलिदान करने के लिए तैयार होने को कहा गया है। जब भी देश पर कोई संकट आए तो देशवासियों को अपने प्राणों बाजी लगाकर देश को बचाना चाहिए।
(ग) कवि ने तालाब की समानता दर्पण से इसलिए की है क्योंकि तालाब का जल अत्यंत स्वच्छ व निर्मल होता है। वह सभी के प्रतिबिंब दिखाने में सक्षम रहता है। दोनों ही पारदर्शी हैं और दोनों में ही व्यक्ति अपना प्रतिबिंब देख सकता है। तालाब के पानी में पर्वत और उस पर लगे हुए फूलों का प्रतिबिंब स्वच्छ दिखाई दे रहा था। यहाँ कवि ने प्रकृति का मानवीकरण करने की कोशिश की है| काव्य सौंदर्य को बढ़ाने के लिए एवं अपने भावों की पूर्ण अभिव्यक्ति के लिए कवि ने ऐसा रूपक बाँधा है।
अथवा
मीराबाई कृष्ण को अपने प्रियता के रूप में देखा करती थी। वे निरंतर कृष्ण के दर्शन करने में लगी रहती थी। वे कृष्ण को पाने के लिए कुछ भी कार्य करने को तैयार थी। वह सेविका बन कर उनकी सेवा कर उनके साथ रहना चाहती थी। उनके विहार करने के लिए बाग बगीचे लगाना चाहती थी। वृंदावन की गलियों में उनकी लीलाओं का गुणगान करने की तमन्ना रहती थी। ऊँचे महलों में खिड़कियाँ बनवाना चाहती थी क्योंकि वे आसानी से कृष्ण के दर्शन कर सकें। वे उनके दर्शन के लिए हमेशा कुसुम्बी रंग की साड़ी पहनकर यमुना के तट पर आधी रात को प्रतीक्षा करने को तैयार रहती थी।
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