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रेखांकित पदों का पद परिचय दीजिए-

कब्रिस्तान की भूमि को लेकर छोटे-मोटे तनाव होते हैं । एक ऐसी ही अवसर पर मुझे पंचायत में शामिल होना पड़ा।

कब्रिस्तान की: संज्ञावाचक, एकवचन, स्त्रीलिंग


छोटे-मोटे: विशेषण गुणवाचक, बहुवचन, पुल्लिंग


होते हैं: बहुवचन, क्रिया सकर्मक, पुल्लिंग, वर्तमान काल


मुझे: पुरुषवाचक सर्वनाम, कर्ताकारक, एकवचन, पुल्लिंग/स्त्रिलिंग


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निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-

क) कुछ भी सीखना हो तो स्कूल जाना जरूरी नहीं।


(वाक्य का भेद बताइए)


ख) इस नहर को अनेक गुमनाम और अनपढ़ माने गए लोगों ने बनाया था।


(मिश्र वाकय में बदलिए)


ग) उन्हें लगता था कि नमक कर एक सामान्य सा मुद्दा है।


(सरल वाक्य में बदलिए)

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निर्देशानुसार वाच्य परिवर्तित कीजिए-

क) दादा जी के द्वारा हम सबको पुस्तकें दी गई। (कर्मवाच्य में)


ख) उससे चला नहीं जाता।(कर्तवाच्य में)


ग) वह तो उठ भी नहीं सकती। (भाववाच्य में)


- उससे तो उठा भी नहीं जाता।


घ) उन्होंने उछलकर डोर पकड़ ली।(कर्मवाच्य में)

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(क) काव्यांश में निहित रस पहचानकर लिखिए-

श्रीकृष्ण के सुन वचन अर्जुन क्रोध से जलने लगे।


सब शोक अपना भूलकर करतल युगल मलने लगे।


ख) हास्य रस का एक उदाहरण लिखिए।


ग) श्रृंगार रस क स्थानीयभाव का नाम लिखिए।


घ) 'उत्साह' किस रस का स्थायीभाव है?

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

वही पुरानी बालाजी का मंदिर जहाँ बिस्मिल्ला खाँ को नौबतखाने रियाज के लिए जाना पड़ता है। मगर एक रास्ता है बालाजी मंदिर तक जाने का। यह रास्ता रसूलनबाई और बतूलनबाई के यहाँ से होकर जाता है। इस रास्ते से अमीरुद्दीन को जाना अच्छा लगता है। इस रास्ते न जाने कितने तरह के बोल-बनाव कभी ठुमरी, कभी टप्पे, खभी दादरा के मार्फत ड्योढ़ी तक पहुँचते रहते हैं। रसूलन और बतूलन जब गाती है तब अमीरुद्दीन को खुशी मिलती है। अपने ढेरों साक्षात्कारों में बिस्मिल्ला खाँ साहब ने स्वाकर किय है कि उन्हें अपने जीवन के आरंभिक दिनों में संगीत के प्रति आसक्ति इन्हीं गायिका बहिनों को सुनकर मिली है।


क) बिस्मिल्ला खाँ कौन थे? बालाजी मंदिर से उनका क्या संबंध है?


ख) रसूलनबाई और बतूलनबाई के यहाँ से होकर बालाजी के मंदिर जाना बिस्मिल्ला खाँ को क्यों अच्छा लगता था?


ग) 'रियाज़' से क्या तात्पर्य है?