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पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।

स्वयंप्रकाश की इस रचना में कस्बे के चौराहे पर स्थित पानवाला एक काफी खुशमिजाज किस्म का व्यक्ति है। उसकी शारिरिक आकृति का रेखाचित्र खींचने पर हम पाते हैं कि वह स्थूल या कहें मोटे कदकाठी का स्वामी है। उसके शरीर का रंग काला है। उसके दांत पान खा खाकर अपनी स्वाभाविक चमक खो चुके हैं। वह गंभीर से गंभीर बात को हंसी में उड़ा जाता है। जैसे मूर्तिकार के नेताजी की मूर्ति पर चश्मा नहीं लगाने के बारे में हालदार साहब के पूछने पर उसका कहना-मास्टर भूल गया होगा से हमें ज्ञात होता है। या फिर कैप्टन को उसका प्यार से लंगड़ा कहने में जिस प्रकार हम पाते हैं। हंसी आने से पूर्व उसकी तोंद थिरकने लगती है और उसके दांत खुल कर सामने आ जाते हैं जिससे उसकी संपूर्ण काया अपनी पूर्णता प्राप्त कर लेती है। वैसे तो वह हंसमुख स्वभाव का है पर उसका अपना रिश्ता जिससे है उसके नुकसान पर वह मर्माहत हो उठता है और तब उसकी आंखों से आंसू निकल आते हैं। जैसे कैप्टन की मृत्यु पर हमें पानवाले में देखने को मिलता है।


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हालदार साहब ने ड्राइवर को पहले चौराहे पर गाड़ी रोकने के लिए मना किया था लेकिन बाद में तुरंत रोकने को कहा-

(क) हालदार साहब पहले मायूस क्यों हो गए थे?


(ख) मूर्ति पर सरकंडे का चश्मा क्या उम्मीद जगाता है?


(ग) हालदार साहब इतनी-सी बात पर भावुक क्यों हो उठे?

3

आशय स्पष्ट कीजिए-

‘‘बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-जिंदगी सब कुछ होम देने वालों पर भी हँसती है और पने लिए बिकने के मौके ढूंढ़ती है।’’

5

‘‘वो लँगड़ा क्या जाएगा फौज में। पागल है पागल!’’

कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए|

6

निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन-सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं-

(क) हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते।


(ख) पानवाला उदास हो गया। उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखे पोंछता हुआ बोला- साहब! कैप्टन मर गया।


(ग) कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।