Q7 of 20 Page 64

जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए

हालदार साहब वास्तव में नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाने वाले के बारे में जानने को उत्सुक थे। जब उन्होंने पानवाले से जाना कि कैप्टन मूर्ति पर चश्मा लगाता है तब उनके मानसपटल पर चश्मा लगाने वाले के बारे में अनोखा चित्र उभरा होगा। उन्होंने सोचा होगा कि कैप्टन कोई फौजी होगा। इसीलिये तो उसके मन में नेताजी के प्रति इतनी श्रद्धा है कि वह रोज आकर उनकी मूर्ति पर चश्मा लगा जाता है। हालदार साहब ने फिर यह भी सोचा होगा कि हो ना हो कैप्टन अवश्य ही नेताजी सुभाषचंद्र बोस के आजाद हिन्द फौज का साथी होगा और इसीलिये उसमें नेताजी और देश के प्रति प्रेम होगा। जिसे कि वह मूर्तिकार द्वारा नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाना भूल जाने के कारण उसे वैसा ही नहीं छोड़ता है बल्कि उनकी मूर्ति की आंखों पर चश्मा लगा देता है।


More from this chapter

All 20 →
5

‘‘वो लँगड़ा क्या जाएगा फौज में। पागल है पागल!’’

कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए|

6

निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन-सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं-

(क) हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते।


(ख) पानवाला उदास हो गया। उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखे पोंछता हुआ बोला- साहब! कैप्टन मर गया।


(ग) कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।

8

कस्बों, शहरों, महानगरों के चौराहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन-सा हो गया है-

(क) इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं?


(ख) आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों?


(ग) उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिए?

9

सीमा पर तैनात फौजी ही देश-प्रेम का परिचय नहीं देते। हम सभी अपने दैनिक कार्यों में किसी न किसी रूप में देश-प्रेम प्रकट करते हैं; जैसे- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना, पर्यावरण संरक्षण आदि। अपने जीवन-जगत से जुड़े ऐसे और कार्यों का उल्लेख कीजिए और उन पर अमल भी कीजिए।