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निम्नलिखित वाक्यों से निपात छाँटिए और उनसे नए वाक्य बनाइए-

(क) नगरपालिका थी तो कुछ न कुछ करती भी रहती थी।


(ख) किसी स्थानीय कलाकार को ही अवसर देने का निर्णय किया गया होगा।


(ग) यानी चश्मा तो था लेकिन संगमरमर का नहीं था।


(घ) हालदार साहब अब भी नहीं समझ पाए।


(ड़) दो साल तक हालदार साहब अपने काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुजरते रहे।

(क) तो, भी

1. मैं तो कल जाऊंगा।


2. मेरे साथ रमेश भी जाएगा।


3.कोई नहीं आए तो भी मैं जाऊंगा। (ख) ही


1. आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।


2. मैं अपनी गलती का खुद ही जिम्मेदार हूँ।


(ग) तो


1. मैं तो अपनी गलती मान लूंगा।


2. वह तो कल आयेगा।


(घ) भी


1.वह भी मेरे साथ है।


2.यहां अच्छे लोग भी हैं।


3.आप भी ज्ञानी हैं।


(ड़) तक


1. मैं परसों तक आऊंगा।


2. महेश मेरे साथ पटना तक जाएगा।


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निम्नलिखित पंक्तियों में स्थानीय बोली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, आप इन पंक्तियों को मानक हिंदी में लिखिए-

कोई गिराक आ गया समझो। उसको चौड़े चौखट चाहिए। तो कैप्टन किदर से लाएगा? तो उसको मूर्तिवाला दे दिया। उदर दूसरा बिठा दिया।

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भई खूब! क्या आइडिया है।’ इस वाक्य को ध्यान में रखते हुए बताइए कि एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों के आने से क्या लाभ होते हैं?

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निम्नलिखित वाक्यों को कर्मवाच्य में बदलिए-

(क) वह अपनी छोटी-सी दुकान में उपलब्ध गिने-चुने फ्रेमों में से नेताजी की मूर्ति पर फिट कर देता है।


(ख) पानवाला नया पान खा रहा था।


(ग) पानवाले ने साफ बता दिया था।


(घ) ड्राइवर ने जोर से ब्रेक मारे।


(ड़) नेताजी ने देश के लिए अपना सब कुछ त्याग दिया।


(च) हालदार साहब ने चश्मेवाले की देशभक्ति का सम्मान किया।

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नीचे लिखे वाक्यों को भाववाच्य में बदलिए-

जैसे- अब चलते हैं। - अब चला जाए।


(क) माँ बैठ नहीं सकती।


(ख) मैं देख नहीं सकती।


(ग) चलो, अब सोते हैं।


(घ) माँ रो भी नहीं सकती।