कस्बों, शहरों, महानगरों के चौराहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन-सा हो गया है-
(क) इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं?
(ख) आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों?
(ग) उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिए?
(क) इस तरह की मूर्ति लगाने का पहला उद्देश्य तो यह हो सकता है कि लोग इन महापुरुषों की स्मृतियों को अपने मन में ताजा बनाये रखें। चूंकि लोग प्रायः रोज इन चौरहों से होकर गुजरते हैं इसलिए मूर्ति का चौराहे पर अवस्थित होने से उनकी एक बार भी मूर्ति की ओर नजर पङने से उनके स्मरण में वो महापुरुष आ जाएंगे। दूसरा उद्देश्य जो कि मूख्य उद्देश्य है और वह है मूर्ति के माध्यम से उन महापुरुष के व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में आम जनता को जानकारी होना। उनकी इन स्थानों के चौराहे पर मूर्ति लगाने से इस मुख्य उद्देश्य की भी पूर्ति हो सकती है।
(ख) मैं अपने इलाके के चौराहे पर भगवान बुद्ध की मूर्ति स्थापित करवाना चाहूंगा। हम सभी जानते हैं भगवान बुद्ध मध्यम मार्ग को सर्वश्रेष्ठ मार्ग मानते थे। इसके अन्तर्गत हमें विपरीत परिस्थितियों में भी शान्त बने रहने की प्रेरणा मिलती है। अतः मैं इस मार्ग को जीवन जीने हेतु सर्वथा उपयुक्त मार्ग मानता हूँ और इसके सभी के लिए अनुकरणीय बनाने हेतु मैं बुद्ध की मूर्ति अपने इलाके के चौराहे पर स्थापित करवाना चाहता हूं।
(ग) भगवान बुद्ध की इस मूर्ति के प्रति मेरा पहला दायित्व तो इसकी देखभाल और सुरक्षा हेतु हमारे कदम पर होना चाहिए। मूर्ति सम्मानजनक स्थिति में रहे यह भी मेरे दायित्वों में शामिल है। साथ ही मैं प्रत्येक वर्ष कम से कम बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर इस महापुरुष के सम्मान में कार्यक्रम कर लोगों के बीच जागरुकता फैलाना चाहता हूं।
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