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‘‘वो लँगड़ा क्या जाएगा फौज में। पागल है पागल!’’

कैप्टन के प्रति पानवाले की इस टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखिए|

प्रस्तुत उक्ति लेखक स्वयंप्रकाश ने पानवाले के मुंह से कहलवाई है। हालदार साहब जब चश्मावाले के बारे में यह जानकर कि लोग उसे कैप्टन कहते हैं वो तब पानवाले से इस बारे में पूछते हैं। उन्हें चश्मावाले के नाम और उसके काम में कुछ विरोधाभास लग रहा था। इसी कारणवश उन्होंने पानवाले से इस बारे में पता करने के उद्देश्य से उससे ऐसा पूछा। और पानवाला तपाक से बोल पङा- वो लंगड़ा क्या जाएगा फौज में, पागल है पागल।“ पानवाला भी अपनी समझ से ऐसा कह रहा था। उसे लग रहा था कि लोग जो अर्थोपार्जन कर यानि अपने रोजगार से सिर्फ अपनी घर-गृहस्थी पर ध्यान दें वैसे लोग ही सामान्य होते हैं ना कि वैसे लोग जो मन में देशभक्ति की भावना रखते हैं और उसी भावना में डूबे रहते हैं। वास्तव में पानवाला कैप्टन चश्मावाले की देशभक्ति की भावना को गहराई से नहीं समझ पा रहा था और वह कैप्टन की शारिरिक कमजोरी को भी उसकी स्थिति की गहराई में न जाकर उसकी वस्तुस्थिति को ना समझ पाने के कारण ही उसे लंगड़ा संबोधित कर रहा था। वह वास्तव में अधिक पढ़ा लिखा ना होने के कारण भी ऐसा कह रहा था। अधिक पढ़ा लिखा होने पर मनुष्य समझदार तो हो ही जाता है जिसकी कमी पानवाले में दिख रही थी और इसिलिए वह चश्मावाले के बारे में कटु सत्य कह रहा था।


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3

आशय स्पष्ट कीजिए-

‘‘बार-बार सोचते, क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी-जवानी-जिंदगी सब कुछ होम देने वालों पर भी हँसती है और पने लिए बिकने के मौके ढूंढ़ती है।’’

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पानवाले का एक रेखाचित्र प्रस्तुत कीजिए।

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निम्नलिखित वाक्य पात्रों की कौन-सी विशेषता की ओर संकेत करते हैं-

(क) हालदार साहब हमेशा चौराहे पर रुकते और नेताजी को निहारते।


(ख) पानवाला उदास हो गया। उसने पीछे मुड़कर मुँह का पान नीचे थूका और सिर झुकाकर अपनी धोती के सिरे से आँखे पोंछता हुआ बोला- साहब! कैप्टन मर गया।


(ग) कैप्टन बार-बार मूर्ति पर चश्मा लगा देता था।

7

जब तक हालदार साहब ने कैप्टन को साक्षात देखा नहीं था तब तक उनके मानस पटल पर उसका कौन-सा चित्र रहा होगा, अपनी कल्पना से लिखिए