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नीचे दिए गए निबंध का अंश पढ़िए और समझिए कि गद्य की विविध विधाओं में एक ही भाव को अलग-अलग प्रकार से कैसे व्यक्त किया जा सकता है-

देश-प्रेम

प्रस्तुत निबंध में गद्य की विविध विधाओं में एक ही भाव देशप्रेम के भाव को विभिन्न प्रकार से व्यक्त किया गया है। यहां पर एक ओर तो हमारे देशप्रेम के भाव को हमारे देश के प्राकृतिक सौंदर्य के बारे में जानकारी से है। निबंध में समझाया गया है कि हम देशप्रेम तभी कर सकते हैं जब हम देश की हर वस्तु से प्रेम करेंगे। वरना हमारा देशप्रेम का भाव हमारे देश के बारे में कोरा ज्ञान तक ही सिमट कर रह जाएगा

लेखक का दूसरी ओर कहना है कि लोग जो हमारे देश के प्राकृतिक सौंदर्य के बारे में अनजान हैं वे अपने देश से प्रेम कैसे कर सकते हैं? लेखक का कहना है कि ये लोग तो अपने देश की प्रकृति से अनजान हैं। ये लोग कहीं दूर बैठकर देश की समस्या के बारे में बिना यहां की हवा में सांस लिये कैसे जान सकते हैं? इन लोगों को कोयल और चातक पक्षियों के बारे में पता नहीं है। इन्हें किसान की समस्याओं के बारे में पता नहीं है। फिर ये किस प्रकार देशप्रेम की भावना से लैस होकर हमारे देश की आर्थिक प्रगति में अपना योगदान दे सकते हैं? इस प्रकार लेखक देशप्रेम की भावना को दो भिन्न प्रकार से व्यक्त कर गद्य की विभिन्न विधाओं में व्यक्त एक भाव देशप्रेम को अलग-अलग प्रकार से व्यक्त करते हैं। इसमें एक प्रेम देश के प्रति देश के बारे में जानकारी होने से अपने मूलरुप में है और दूसरा प्रेम लेखक की नजर में देशप्रेम तो है पर अपने देश की प्रकृति के बारे जानकारी के अभाव में यह प्रेम प्रभावोत्पादक नहीं है। हालांकि दोनों प्रेम एक ही भाव से उत्पन्न होते हैं और यह देशप्रेम का भाव है।


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