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कैप्टन फेरी लगाता था।

फेरीवाले हमारे दिन-प्रतिदिन की बहुत-सी जरूरतों को आसान बना देते हैं। फेरीवालों के योगदान व समस्याओं पर एक संपादकीय लेख तैयार कीजिए।

फेरीवाले कई प्रकार के सामान को अपनी छोटी सी गाड़ी में लादकर एक स्थान से दूसरे स्थान उन सामानों को बेचने के उद्देश्य से घूमते रहते हैं। ये अपने गले से सुरीली आवाज निकालकर संभावित ग्राहक का ध्यान अपनी ओर खींचने का प्रयास करते हैं। इनकी बोली-चाली और व्यवहार से लगता नहीं है कि ये अन्दर से कितने दुखी हैं। सर्वप्रथम तो हम जानें कि ये फेरीवाले सामान बेचने की जुगत में अपने घरों से दूर निकल जाते हैं। इनका कोई स्थाई ठिकाना नहीं होता है और इनमें से अधिकांश को सर्दी, गर्मी और बरसात के मौसम का सामना अपने सामान को बेचने के क्रम में करना पङता है। इनकी आमदनी अधिक नहीं होती है फिर भी इन्हें अपने ग्राहकों की फरमाइश उनके द्वार पर जाकर पूरी करनी पङती है और ऐसा करते समय वे ग्राहकों को नाराज करने का जोखिम नहीं मोल ले सकते हैं। इस प्रकार हमारे जीवन को सरल बनाने में फेरी वाले का बहुत योगदान है। और उनकी अपनी समस्याएं भी इस प्रकार काफी हैं।


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लेखक का अनुमान है कि नेताजी की मूर्ति बनाने का काम मजबूरी में ही स्थानीय कलाकार को दिया गया-

(क) मूर्ति बनाने का काम मिलने पर कलाकार के क्या भाव रहे होंगे?


(ख) हम अपने इलाके के शिल्पकार, संगीतकार, चित्रकार एवं दूसरे कलाकारों के काम को कैसे महत्व और प्रोत्साहन दे सकते हैं, लिखिए।

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आपके विद्यालय में शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण विद्यार्थी हैं। उनके लिए विद्यालय परिसर और कक्षा-कक्ष में किस तरह के प्रावधान किए जाँए, प्रशासन को इस संदर्भ में पत्र द्वारा सुझाव दीजिए।

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नेताजी सुभाषचंद्र बोस के व्यक्ति और कृतित्व पर एक प्रोजेक्ट बनाइए।

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अपने घर के आस-पास देखिए और पता लगाइए कि नगरपालिका ने क्या-क्या काम करवाए हैं? हमारी भूमिका उसमें क्या हो सकती है?