Q10 of 20 Page 64

निम्नलिखित पंक्तियों में स्थानीय बोली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है, आप इन पंक्तियों को मानक हिंदी में लिखिए-

कोई गिराक आ गया समझो। उसको चौड़े चौखट चाहिए। तो कैप्टन किदर से लाएगा? तो उसको मूर्तिवाला दे दिया। उदर दूसरा बिठा दिया।

लेखक ने प्रस्तुत उक्ति पानवाले के मुंह से कहलवाई है। वास्तव में हालदार साहब कैप्टन द्वारा नेताजी की मूर्ति पर अलग-अलग चश्मा लगाने का कारण जानने के बारे में उत्सुक थे। उन्होंने इस बारे में पानवाले से पूछा। तब पानवाले ने हालदार साहब को जो बातें उत्तर के रूप में बताईं वही प्रस्तुत उक्ति बनकर हमारे सामने आया है। पानवाले का उत्तर है-आप समझिये। चश्मा के दुकानदार कैप्टन के पास कोई चश्मा के मोटे फ्रेम की चाह रखने वाला ग्राहक आ गया होगा और वह फ्रेम कैप्टन के नेताजी की मूर्ति पर पहले ही अच्छा समझकर लगा दिया होगा। अब उसे ग्राहक की मांग पर उसे उसकी पसंद की मोटी फ्रेम वाला चश्मा भी उपलब्ध कराना था। अब वह चश्मा कहां से लाता? इसीलिये कैप्टन ने मूर्ति वाला मोटा फ्रेम उतारकर उस ग्राहक को दे दिया और नेताजी की मूर्ति पर उसने अपनी पसंद का दूसरा चश्मा लगा दिया।


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8

कस्बों, शहरों, महानगरों के चौराहों पर किसी न किसी क्षेत्र के प्रसिद्ध व्यक्ति की मूर्ति लगाने का प्रचलन-सा हो गया है-

(क) इस तरह की मूर्ति लगाने के क्या उद्देश्य हो सकते हैं?


(ख) आप अपने इलाके के चौराहे पर किस व्यक्ति की मूर्ति स्थापित करवाना चाहेंगे और क्यों?


(ग) उस मूर्ति के प्रति आपके एवं दूसरे लोगों के क्या उत्तरदायित्व होने चाहिए?

9

सीमा पर तैनात फौजी ही देश-प्रेम का परिचय नहीं देते। हम सभी अपने दैनिक कार्यों में किसी न किसी रूप में देश-प्रेम प्रकट करते हैं; जैसे- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुँचाना, पर्यावरण संरक्षण आदि। अपने जीवन-जगत से जुड़े ऐसे और कार्यों का उल्लेख कीजिए और उन पर अमल भी कीजिए।

11

भई खूब! क्या आइडिया है।’ इस वाक्य को ध्यान में रखते हुए बताइए कि एक भाषा में दूसरी भाषा के शब्दों के आने से क्या लाभ होते हैं?

12

निम्नलिखित वाक्यों से निपात छाँटिए और उनसे नए वाक्य बनाइए-

(क) नगरपालिका थी तो कुछ न कुछ करती भी रहती थी।


(ख) किसी स्थानीय कलाकार को ही अवसर देने का निर्णय किया गया होगा।


(ग) यानी चश्मा तो था लेकिन संगमरमर का नहीं था।


(घ) हालदार साहब अब भी नहीं समझ पाए।


(ड़) दो साल तक हालदार साहब अपने काम के सिलसिले में उस कस्बे से गुजरते रहे।