निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प छांटकर लिखिए-
धर्मराज, सन्यास योजना कायरता है मन की,
है सच्चा मनुजत्व ग्रंथियो सुलझाना जीवन की।
दुर्लभ नहीं मनुज के हित, निज व्यक्तिक सुख पाना,
किन्तु कठिन है कोटी कोटि मनुजों को सुखी बनाना।
आशा के प्रदीप को जलाए चलो धर्मराज,
एक दिन होगी मुक्त भूमि रण भीती से,
भावना मनुष्य की न राग में रहेगी लिप्त,
सेवित रहेगा नहीं जीवन अनीती से,
स्नेह बलिदान होंगे माप नरता के एक
धऱती मनुष्य की बनेगी स्वर्ग प्रीति से।
(1) कवि के ‘मन की कायरता’ किसे माना है?
क) अहिंसा ।
ख) सन्यास ।
ग) असत्य ।
घ) गरीबी ।
(2) काव्यांश में सर्वाधिक कठिन कार्य क्या बताया गया है ?
क) शासन चलाना ।
ख) युद्ध में विजय पाना ।
ग) मानव जाति को सुखी बनाना ।
घ) सन्यास लेना ।
(3) मानवता की माप किससे की जाएगी ?
क) स्नेह तथा बलिदान से ।
ख) सम्पनन्ता से ।
ग) शक्ति से ।
घ) आधुनिकता से ।
(4) किस बात के लिए कवि आशान्वित है ?
क) स्नेह बलिदान समाप्त होंगे ।
ख) धरती और स्वर्ग की दूरी मिट जाएगी ।
ग) व्यक्ति स्वयं का विकास करेगा ।
घ) धऱती युद्ध के भय से मुक्त होगी।
(5) वैयक्तिक शब्दों में कौन से प्रत्यय है ?
क) क ।
ख) तक ।
ग) इक ।
घ) इत ।
(1) (ख) संन्यास
कवि ने ‘मन की कायरता’ अहिंसा, सन्यास एवं असत्य को माना है।
(2) (ग) मानव जाति को सुखी बनाना
काव्यांश में सर्वाधिक कठिन सभी मनुष्यों को सुखी रखना, एवं जनहित का ध्यान रखना बताया गया है।
(3) (क) स्नेह तथा बलिदान से
मानवता की माप इन बातो से की जाएगी
(i) मनुष्य का औरों के लिए स्नेह|
(ii) बलिदान की भावना।
(iii) मानवीय जीवन में आधुनिकता।
(4) (घ) धरती युद्ध के भय से मुक्त होगी
कवि आशान्वित है क्योंकि उसे लगता है कि -
(i) धरती और स्वर्ग के बीच नजदीकियाँ आयेगी और दूरी मिट जाएगी ।
(ii) स्नेह बलिदान समाप्त होंगे ।
(iii) व्यक्ति खुदके विकास पर ध्यान देगा जिससे समाज का विकास होगा।
(iv) धऱती पर प्रेम बढ़ेगा एवं युद्ध का भय कम होगा।
(5) (ग) इक
वैयक्तिक शब्द में इक प्रत्यय है|
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