निम्नलिखित गद्यांश का एक तिहाई शब्दों में सार लिखते हुए उसका उचित शीर्षक भी लिखिए।
छात्रों में अनेक बुराइयां कुसंगति के प्रभाव से उत्पन्न होती हैं। जो छात्र पहले पढाई में खूब रुचि लेता था किंतु अब सिनेमा देखने में मस्त रहता है, निश्चित ही यह कुसंगति का प्रभाव है। शुरु मे कोई उसे सिनेमा देखने में मस्त रहता है, निश्चित ही यह कुसंगति का प्रभाव है। शुरु मे कोई छात्र उसे सिनेमा दिखाना प्रारंभ करता है, बाद में उसे सिनेमा देखने की आदत पड़ जाती है। यही हालत घूम्रपान करने वालों की होती है। जब उन्हें घूम्रपान की आदत पड़ जाती है तब वह छूटने का नाम नहीं लेती। इसलिए तो पंडित रामचंद्र शुक्ल ने कहा है कि कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है, वह न केबल मान मर्यादा का विनाश करता है बल्कि सात्विक चित्तवृत्ति को भी नष्ट कर देता है। जो भी कभी कुसंग के चक्कर में फंसा, नष्ट हुए बिना नहीं रहा। कुमार्गगामी दूसरे को भी अपने जैसा बना लेता है।
“कुसंगति और जीवन”
कुसंगति एवं उसका प्रभाव हमारे जीवन पर बहुत गंभीर होता| कुसंगति के बारे हमारे जीवन की दिशा बदल जाती है और हम अपने पथ से विचलित हो जाते हैं| रामचंद्र शुक्ल ने कहा है कि कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है, वह न केबल मान मर्यादा का विनाश करता है बल्कि सात्विक चित्तवृत्ति को भी नष्ट कर देता है। इसीलिये हमें हमेशा अपनी संगत सही रखनी चाहिए क्योंकि हमारी सही अथवा गलत संगत ही हमारे जीवन को सही दिशा प्रदान करती है|
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