निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
कोलाहल हो
या सन्नाटा कविता सदा सृजन करती है
जब भी आँसू हुआ पराजित,
कविता सदा जंग लड़ती है
जब भी कर्ता हुआ अकर्ता
कविता ने जीना सिखलाया
जब भी तम का जुल्म बढ़ा है,
कविता नया सूर्य गढ़ाती है,
जब गीतों की फसलें लुटतीं
शीलहरण होता कलियों का,
शब्दहीन जब हुई चेतना
तब-तब चैन लुटा गलियों का
अपने भी हो गए पराए
यों झूठे अनुबंध हो गए
घऱ में ही वनवास हो रहा
यों गूंगे संबंध हो गए।
क) कविता कैसी परिस्थियों में सृजन करती है? स्पष्ट कीजिए।
ख) भाव समझाइए ‘जब भी तम का जुल्म बढ़ा है, कविता नया सूर्य गढ़ती है।’
ग) गलियों का चैन कब लुटता है?
घ) ‘परस्पर संबंधों में दूरियाँ बढ़ने लगीं’- यह भाव किस पंक्ति में आया है?
ङ) कविता जीना कब सिखाती है?
OR
जो बीत गई सो बात गई।
जीवन में एक सितारा था,
माना, वह बेहद प्यारा था,
वह डूब गया तो डूब गया।
अंबर के आनन को देखो,
कितने इसके तारे टुटे,
कितने इसके प्यारे छूटे,
जो छूट गए फिर कहाँ मिले;
पर बोलो टूटे तारों पर,
कब अंबर शोक मनाता है?
जो बीत गई सो बात गई।
जीवन में वह था एक कुसुम,
थे उस पर नित्य निछावर तुम,
वह सूख गया तो सूख गया;
मधुबन की छाती को देखो,
सूखी कितनी इसकी कलियाँ
मुरझाई कितनी वल्लरियाँ,
जो मुरझाई फिर कहाँ खिलीं,
पर बोलो सूखे फूलों पर,
कब मधुबन शोर मचाता है?
जो बीत गई सो बात गई।
क) ‘जो बीत गई सो बात गई’ से क्या तात्पर्य है? स्पष्ट कीजिए।
ख) आकाश की ओर कब देखना चाहिए और क्यों?
ग) ‘सूखे फूल’ और ‘मधुबन’ के प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए।
घ) टूटे तारों का शोक कौन नहीं मनाता है?
ङ) आपके विचार से ‘जीवन में एक सितारा’ किसे माना होगा?