‘साना-साना हाथ जोडि’ के आधार पर गंगतोक के मार्ग के प्राकृतिक सौन्दर्य का वर्णन कीजिए जिसे देखकर लेखिका को अनुभव हुआ- “जीवन का आनंद है यही चलायमान सौन्दर्य!”
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‘जार्ज पंचम की नाक’ के बहाने भारतीय शासनतंत्र पर किये गए व्यंग्य को स्पष्ट करते हुए पत्रकारों की भूमिका पर भी टिप्पणी कीजिए|
लेखिका ने इस यात्रा के दौरान आसमान छूते पर्वत शिखरों को देखा, दूध की धार की तरह झर-झर करते गिरते प्रपातों को देखा, चिकने गुलाबी पत्थरों के बीच इठला कर बहती नदियों को देखा, शिखरों के शिखर से गिरता ‘सेवन सिस्टर्स वाटर फॉल’ देखा| लेखिका ने इस यात्रा के दौरान प्रकृति की सुन्दरता को देखा और महसूस किया कि जीवन का आनंद है यही चलायमान सौन्दर्य|
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नाक को मान-सम्मान एवं प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है| इसी नाक को विषय बनाकर लेखक ने इस व्यंग्य को लिखा है| भारत को आजाद हुए बहुत वक्त हो गया लेकिन हमारी मानसिकता में अभी भी गुलामी समाई हुई है| इस पाठ में लेखक ने वर्तमान पत्रकारिता पर भी करारा व्यंग्य किया है| वर्तमान पत्रकारिता में चर्चित हस्तियों के पहनावे और खान-पान संबंधी आदतों को अधिक महत्त्व दिया जाता है जबकि पत्रकारों को इन मुद्दों के बजाय देश के असली मुद्दों को उठाना चाहिए| ऐसे मुद्दे जो बहुसंख्यक अवादी को प्रभावित करते हों, जो नागरिक समाज की समस्याओं से संबंधित हों| लेकिन वर्तमान पत्रकारिता इन मुद्दों की जगह कभी किसी बड़ी हस्ती के कपड़ों की बात करती है तो कभी उसकी जीवन शैली की बाते करके असली मुद्दों को हवा कर देती है| इस पाठ के माध्यम से लेखक ने पत्रकारिता की इसी हालत के बारे में बताया है|
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