निम्नलिखित में से किन्हीं चार के उत्तर संक्षेप में लिखिए-
क) मन्नू भण्डारी के पिता के दकियानूसी मित्र ने उन्हें क्या बताया कि वे भड़क उठे?
ख) बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के आश्चर्य का कारण क्यों थी?
ग) कैसे कह सकते हैं कि बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे?
घ) ‘फादर बुल्के की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी लगती थी’- इस मान्यता का कारण समझाइए।
ङ) ‘नेताजी का चश्मा’ पाठ के आधार पर आशय समझाइए- ‘क्या होगा उस कौम का जो अपने देश की खातिर घर-गृहस्थी, जवानी-जिंदगी सब कुछ होम देने वालों पर भी हँसती है....।’
(क) आजाद हिन्द फ़ौज के मुकदमे के सिलसिले में मन्नू भंडारी द्वारा दिए गए एक भाषण के खिलाफ एक बार मन्नू के पिता जी को उनके दोस्त ने मन्नू भंडारी के खिलाफ भड़काया। उन्होंने कहा कि अच्छे घर की लड़कियों को यह सब करना शोभा नहीं देता। उनके दोस्त ने बताया कि आपकी बेटी हडतालों एवं धरना प्रदर्शनों में भाग लेती है और वहाँ पर भाषणबाजी करती है| इसे सुनकर मन्नू के पिताजी भड़क गए|
(ख) बालगोबिन भगत अपने दैनिक जीवन में कुछ ऐसे नियमों का पालन करते थे जिन्हें एक गृहस्थ के रूप में निभाना अत्यंत कठिन था| उदाहरण के तौर पर देखें तो – वे सुबह जल्दी उठकर दो मील दूर स्नान करने जाते थे, दोनों समय ईश्वर के गीत गाते| हर वर्ष गंगा स्नान करने जाते और संत समागम में भाग लेते| बालगोबिन भगत की यही दिनचर्या लोगों के लिए आश्चर्य का कारण थी|
(ग) बिस्मिल्ला खां वैसे तो मुसलमान थे लेकिन हिंदू रीति रिवाजों के पक्षधर थे। बिस्मिल्ला खां बाबा विश्वनाथ के मंदिर में जाकर शहनाई बजाते थे। इसके साथ ही घंटों गंगा किनारे शहनाई बजाकर रियाज भी करते थे। वाराणसी छोड़ने के ख्याल से ही बिस्मिल्ला खां परेशान हो जाया करते थे क्योंकि वह खुद को गंगाजी और बाबा विश्वनाथ से अलग नहीं रखना चाहते थे। बिस्मिल्ला खां धर्म अथवा जाति को नहीं मानते थे उनके लिए संगीत ही धर्म था। इसलिए बिस्मिल्ला खां को मिली-जुली संस्कृति का प्रतीक माना जाता है|
(घ) देवदार का वृक्ष बड़ा और छायादार होता है। वह सबको अपनी छाया प्रदान करता है| फादर बुल्के भी इसी देवदार के वृक्ष की तरह थे| वे खुद तो सन्यासी थे लेकिन फिर भी सब के साथ पारिवारिक संबंध बनाकर रखते थे| वे सबके घरों में आयोजित होने वाले उत्सवों और संस्कारों में उपस्थित रहते थे| वे प्रत्येक व्यक्ति को स्नेह और प्यार देते थे| इन्हीं सब वजहों से फादर बुल्के की उपस्थिति को देवदार की छाया के समान बताया गया है|
(ड.) इस कथन का आशय यह है कि ऐसे जाति, वर्ग एवं समुदाय का विकास नहीं हो सकता जो देश के लिए सब कुछ न्योछावर करने वालों का उपहास उड़ाता है| आम आदमी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इतना उलझ जाता है कि उसे किसी और बात की सुध नहीं रहती। हम अपनी जिंदगी में इतने मशरूफ हो जाते हैं कि अपने देश के लिए बलिदान देने वाले लोगों को भी भूल जाते हैं। यह अच्छी बात नहीं है। सच्चा और अच्छा देश वही बनता है जहां के लोग अपने हीरो का सम्मान करते है एवं उसे याद रखते हैं|
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