निम्नलिखित में से किन्ही चार प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए-
क) संगतकार की मनुष्यता किसे कहा गया है। वह मनुष्यता कैसे बनाए रखता है?
ख) ‘अट नहीं रही है’ कविता के आधार पर वसंत ऋतु की शोभा का वर्णन कीजिए।
ग) परशुराम ने अपनी किन विशेषताओं के उल्लेख के द्वारा लक्ष्मण को डराने का प्रयास किया?
घ) आपकी दृष्टि में कन्या के साथ दान की बात करना कहाँ तक उचित है? तर्क दीजिए।
ङ) कवि ने शिशु की मुस्कान को दंतुरिन मुस्कान क्यों कहा है? कवि के मन पर उस मुस्कान का क्या प्रभाव पड़ा?
(क) संगतकार में योग्यता, प्रतिभा, क्षमता और अवसर होने पर भी वह अपनी आवाज को मुख्य गायक की आवाज से ऊंचा नहीं उठाता है। वह कभी भी अपनी गायिकी को मुख्य गायक से बेहतर साबित करने का प्रयास नहीं करता। इसे संगतकार की मनुष्यता कहा गया है। वह मुख्य गायक को पूरा सम्मान देते हुए अपनी आवाज को हमेशा मुख्य गायक से नीचे रखता है| संगतकार का यह कार्य उसकी मनुष्यता का प्रतीक है|
(ख) ‘अट नहीं रही है’ कविता के आधार पर कवि ने वसंत ऋतु की सुंदरता का वर्णन किया है। कवि कहता है कि वसंत ऋतु के समय सुंदरता प्रकृति के कण-कण में बसी होती है। प्रकृति के कोने कोने में अनूठी सी सुगंध भर जाती है जो कवि की कल्पना को और ऊंची उड़ान देती है।
(ग) परशुराम ने अपनी निम्नलिखित विशेषताओं के उल्लेख के द्वारा लक्ष्मण को डराने का प्रयास किया-
1. मैं पूरे विश्व में क्षत्रियों के घोर विरोधियों के रूप में प्रसिद्ध हूं।
2. मैंने अपनी इन्हीं भुजाओं द्वारा कई बार पृथ्वी को राजाओं से रहित किया है। ब्राह्मणों को दान में दिया है।
3. इस फरसे से कई बाहुबलियों की भुजाओं को काट डाला है। परशुराम ने अपनी इन्हीं विशेषताओं का उल्लेख कर लक्ष्मण को डराने का प्रयास किया|
(घ) हमारे समाज में युगों से कन्यादान की परंपरा चली आती रही है। लड़की की शादी के बाद वह अपने पति के घर रहने जाती है। शादी के दौरान कन्या का दान किया जाता है। मेरी नजर में यह कन्या का दान एकदम गलत है। आजकल लड़का और लड़की दोनों को एक समान माना जाता है। लोग लड़कों की तरह लड़कियों को भी पूरी शिक्षा दे रहे हैं। यहां तक कि वह लड़कों की ही तरह कंधे से कंधा मिलाकर नौकरी भी कर रही हैं। ऐसे में कन्या दान की बात कहना पूरी तरह से मेरी नजर में गलत है।
(घ) कवि ने बच्चों की सुंदरता के बारे में बताया है| कवि ने बताया है कि बच्चा इतना छोटा है कि अभी उसके दांत निकलने शुरू हुए हैं| जब बच्चा मुस्कुराता है तो तो उसके नन्हें दांत झिलमिलाते हैं| उसकी मोहाक मुस्कान और सफ़ेद दाँतों की झिलमिलाहट से शिशु का सौन्दर्य अनुपम छटा ले लेता है और देखने वाले को आनंदित करता है| कवि ने इसीलिये शिशु की मुस्कान को दंतुरित मुस्कान कहा है| कवि जब शिशु की दंतुरित मुस्कान को देखता तो वह मुस्कान उसे आनंदित कर देती है| शिशु की मुस्कान ऐसी है कि किसी मुर्दे में भी जान डाल दे|
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