किसी विशेष टी. वी. चैनल द्वारा अंधविश्वासों को प्रोत्साहित करने वाले अवैज्ञानिक और तर्कहीन कार्यक्रम प्रायः दिखाए जाने पर अपने विचार व्यक्त करते हुए किसी समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखिए।
OR
आप अपने किसी चूक के लिए बहुत लज्जित हैं और मां के सामने जाने का साहस भी नहीं जुटा पा रहे हैं। तथ्यों को स्पष्ट करते हुए माँ को पत्र लिखकर क्षमायाचना कीजिए।
सेवा में,
प्रधान संपादक महोदय,
दैनिक भास्कर,
नई दिल्ली
विषय- अंधविश्वास को प्रोत्साहन देने वाले तर्कहीन कार्यक्रम के बारे में|
महोदय,
आपका चैनल मैं रोजाना देखती हूं। बीते कई दिनों से आपके चैनल पर एक कार्यक्रम आ रहा है जो मुझे तर्कहीन और आधाररहित लगता है। इस आधे घंटे के कार्यक्रम में सिर्फ अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाली जानकारियां दी जाती है। आपका चैनल लोकप्रिय चैनल है लिहाजा इस कार्यक्रम के माध्यम से आप हजारों-लाखों लोगों को इस तरह से अंधविश्वास के प्रति प्रोत्साहित कर रहे है। मेरी आपसे गुजारिश है कि इस कार्यक्रम को तत्काल रूप से बंद किया जाए क्योंकि इसका लोगों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
धन्यवाद
भवदीया
शिप्रा शर्मा
A-32, सेक्टर 44, नॉएडा, उत्तर प्रदेश
OR
आदरणीय माँ
सादर प्रणाम,
मां मैं आपसे कई दिनों से कुछ कहना चाह रही थी लेकिन सामने कहने की हिम्मत नहीं हो रही थी। इसलिए अपने मन की बात आपको इस पत्र के माध्यम से बता रही हूं। मां, मैंने आपसे एक बात छुपाई लेकिन अब सबकुछ ठीक हो गया है तो आपको बिना बताए मेरा मन नहीं मान रहा। दीदी की शादी के दौरान सारा पैसा शादी के खर्चों में फँस गया था| मेरे और दीदी के पास जितने भी पैसे थे हम लोगों ने सब शादी में खर्च कर दिए| इसके बाद भी कई बड़े पेमेंट बचे थे। मैंने और दीदी ने दोस्तों और मामा की मदद ली। उस वक्त आपको इसलिए नहीं बताया कि आप परेशान हो जाती। लेकिन अब उधारी का सारा पैसा चुका दिया है| मैं आशा करती हूँ कि आप मुझे इस बात को छुपाने के लिए माफ़ कर देंगीं|
आपकी आज्ञाकारी बेटी
प्रिय मिश्रा
मुखर्जी नगर, दिल्ली
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