‘जार्ज पंचम की नाक’ के माध्यम से लेखक ने समाज पर क्या व्यंग्य किया है?
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सिक्किम की युवती के कथन ‘मैं इंडियन हूँ’ से स्पष्टत होता है कि अपनी जाति, धर्म-क्षेत्र और संप्रदाय से अधिक महत्वपूर्ण राष्ट्र है। आप किस प्रकार राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्य निभाकर देश के प्रति अपना प्रेम प्रकट कर सकते हैं? समझाइए।
‘जार्ज पंचम की नाक’ पाठ के माध्यम से लेखक ने समाज पर करारा व्यंग्य किया है| लेखक ने इस पाठ में बताया है कि किस प्रकार से समाज में नाक को मान-समान और प्रतिष्ठा का घोतक माना माना जाता है| जार्ज पंचम की लाट पर नाक लगेगी अथवा नहीं इसे लेकर उस दौर के समाज के द्वारा कई आन्दोलन किये गए| जार्ज पंचम की लाट पर नाक लगेगी तभी भारत की नाक बचेगी अर्थात भारत के मान-समान को जार्ज पंचम की लाट पर नाक लगाने से जोड़कर देखा गया| 40 करोड़ जनसंख्या के देश में एक व्यक्ति की लाट पर नाक लगाने को पूरे देश का मान-सम्मान मानना अनुचित है| उस समय के समाज पर यह व्यंग्य भली प्रकार से उपयुक्त बैठता है|
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सिक्किम की लड़की के कथन ‘मैं इंडियन हूं’ से स्पष्ट होता है कि उसके लिए अपनी जाति, धर्म-क्षेत्र और संप्रदाय से अधिक महत्वपूर्ण राष्ट्र है। मेरे अनुसार अगर देश का हर नागरिक यही सोच रखे तो वह अपने कर्तव्यों का निर्वहन अच्छी तरह से कर लेगा। राष्ट्र प्रेम साबित करने के लिए सबसे पहले आपको अपने कर्तव्य जानने होंगे। एक सच्चा राष्ट्र भक्त वही होता है जो हर पल या यूं कहे कि अपना हर फैसला सोच समझ कर लेता है। उसका प्रत्येक फैसला राष्ट्र के हित में होता है और उसके किसी भी फैसले से राष्ट्र एवं राष्ट्र के नागरिकों को नुकसान नहीं होता| आप देश में हो रहे गलत कार्यों एवं कुरीतियों पर लगाम लगाने की कोशिश करें| ऐसा करके ना सिर्फ आप लोगों को इस गलत कदम के प्रति रोक पाएंगे बल्कि देश के विकास में सहयोग भी दे पाएंगे। इन सभी कार्यों को करके आप ना केवल देश के सच्चे नागरिक बल्कि सच्चे राष्ट्र भक्त भी कहलाएंगे। हम सब इन कर्तव्यों का पालन कर राष्ट्र के प्रति अपने प्रेम को प्रकट कर सकते हैं|
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