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निम्नलिखित वाक्यों में से ही किन्हीं चार रेखांकित पदों का पद-परिचय लिखिए-

क) दादी जी प्रतिदिन समाचार पत्र पढ़ती हैं


ख) रोहन यहाँ नहीं आया था।


ग) वे मुंबई जा चुके हैं।


घ) परिश्रमी अंकिता अपना काम समय से पूरा कर लेती है।


ङ) रवि रोज सवेरे दौड़ता है।


(क) सक्रर्मक क्रिया, स्त्रीलिंग, वर्तमान काल, एक वचन

(ख) स्थान वाचक क्रिया विशेषण(क्रिया के होने का स्थान बताने वाला)


(ग) सर्वनाम, कर्ता


(घ) गुण वाचक विशेषण


(ड.) व्यक्तिवाचक संज्ञा, कर्ता, एकवचन


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3

निम्नलिखित किन्हीं तीन के उत्तर लिखिए-

क) मैंने उस व्यक्ति को देखा जो पीड़ा से कराह रहा था।


(संयुक्त वाक्य में बदलिए)


ख) जो व्यक्ति परिश्रमी होता है, वह अवश्य सफल होता है।


(सरल वाक्य में बदलिए)


ग) वह कौन-सी पुस्तक है जो आपको बहुत पसंद है।


(रेखांकित उपवाक्य का भेद लिखिए)


घ) कश्मीरी गेट के निकल्सन कब्रगाह में उनका ताबूत उतारा गया।


(मिश्र वाक्य में बदलिए)


4

निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं चार वाक्यों का निर्देशानुसार वाच्य परिवर्तन कीजिए-

क) बालगोबिन भगत प्रभातियाँ गाते थे। (कर्मवाच्य मे बदलिए)


ख) बीमारी के कारण वह यहाँ न आ सका। (भाववाच्य में बदलिए)


ग) माँ के द्वारा बचपन में ही घोषित कर दिया गया था। (कर्तृवाच्य में बदलिए)


घ) अवनि चाय बना रही है। (कर्मवाच्य में बदलिए)


ङ) घायल हंस उड न पाया। (भावाच्य में बदलिए)


6

निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

क) ‘करुण रस’ का एक उदाहरण लिखिए।


ख) निम्नलिखित काव्य पंक्तियों में निहित रस पहचान कर लिखिए-


तंबूरा ले मंच पर बैठे प्रेमप्रताप,


साज मिले पंद्रह मिनट, घंटा भर आलाप।


घंटा भर आलाप, राग में मारा गोता,


धीरे-धीरे खिसक चुके थे सारे श्रोता।


ग) ‘उत्साह’ किस रस का स्थायी भाव है?


घ) वात्सल्य’ रस का स्थायी भाव क्या है?


ङ) श्रृंगार रस के कौन से दो भेद हैं?


7

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-

किसी दिन एक शिष्या ने डरते-डरते खाँ साहब को टोका, ‘बाबा ! आप यह क्या करते हैं, इतनी प्रतिष्ठा है आपकी। अब तो आपको भारतरत्न भी मिल चुका है, यह फटी तहमद न पहना करें। अच्छा नहीं लगता, जब भी कोई आता है आप इसी फटी तहमद में सबसे मिलते हैं।’ खाँ साहब मुस्कराए। लाड़ से भरकर बोले, घत् ! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया में मिला है, लुंगिया ने नाहीं। तुम लोगों की तरह बनाव-सिंगार देखते रहते, तो उमर ही बीत जाती, हो चुकती शहनाई। तब क्या रियाज हो पाता?


क) एक दिन एक शिष्या ने खाँ साहब को क्या कहा? क्यों?


ख) खाँ साहब ने शिष्या को क्या समझाया?


ग) इससे खाँ साहब के स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है?