निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए
एक दिन तने ने भी कहा था,
ज़ड़ ? जड़ तो ज़ड़ ही है;
जीवन से सदा डरी रही है,
और यही है उसका सारा इतिहासकि जमीन में मुँह गड़ाए पड़ी रही है;
लेकिन मैं जमीन से ऊपर उठा,
बाहर निकला, बढ़ा हूँ,
मज़बूत बना हूँ, इसी से तो तना हूँ,
एक दिन डालों ने भी कहा था, तना?
किस बात पर है तना?
जहाँ बिठाल दिया गया था वहीं पर है बना;
प्रगतिशील जगती में तिल-भर नहीं डोला है
खाया है, मोटाया है, सहलाया चोला है;
लेकिन हम तने से फूटी, दिश-दिशा में गयीं
ऊपर उठीं, नीचे आयीं
हर हवा के लिए दोल बनीं, लहराईं,
इसी से तो डाल कहलाई।
(पत्तियों ने भी ऐसा ही कुछ कहा , तो....)
एक दिन फूलों ने भी कहा था,
पत्तियाँ ? पत्तियों ने क्या किया?
संख्या के बल पर डालों को छाप लिया,
डालों के बल पर ही चल-चपल रही हैं,
हवाओं के बल पर ही मचल रही हैं?
लेकिन हम अपने से खुले, खिले, फूले हैं-
रंग लिए, रस लिए, पराग लिए –
हमारी यश-गंध दूर-दूर-दूर फैली है,
भ्रमरों ने आकर हमारे गुन गाए हैं,
हम पर बौराए हैं ।सब की सुन पाई है, जड़ मुसकाई है !
(क) तने का जड़ को जड़ कहने से क्या अधिप्राय है?
1. मज़बूत है
2. समझदार है
3. मूर्ख है
4. उदास है
(ख) डालियों ने तने के अहंकार को क्या कहकर चूर-चूर कर दिया?
1. जड़ नीचे है तो यह ऊपर है
2. यों ही तना रहता है
3. उसका मोटापा हास्यास्पद है
4 प्रगति के पथ पर एक कद़म भी नहीं बढ़ा
(ग) पत्तियों के बारे में क्या नहीं कहा गया है ?
1. संख्या के बल से बलवान् है
2. हवाओं के बल पर डोलती हैं
3. डालों के कारण चंचल हैं
4. सबसे बलशाली हैं
(घ) फूलों ने अपने लिए क्या नहीं कहा ?
1. हमारे गुणों का प्रचार-प्रसार होता है
2. दूर-दूर तर हमारी प्रशंसा होती है
3. हम हवाओं के बल पर झूमते हैं
4. हमने अपना रूप-स्वरूप खु ही सँवारा है
(ङ) जड़ कयों मुसकराई?
1. सबने अपने अहंकार में उसे भुला दिया
2. फूलों ने पत्तियो को भुला दिया
3. पत्तियों ने डालियों को भूला दिया
4. डालियों ने तने को भुला दिया
(क) 3
तने का जड़ को जड़ कहने से तात्पर्य उसकी मजबूती बताने से है|
(ख) 4
डालियों ने तने के अहंकार को यह कहकर चूर-चूर कर दिया कि तना तो प्रगति के पथ पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा तो फिर अहंकार किस बात का|
(ग) 4
इस काव्यांश में पत्तियों के बारे में यह कहा गया है कि वे संख्या के बल पर बलवान हैं, हवाओं के बल पर डोलती हैं, डालों के कारण चंचल हैं लेकिन वे सबसे बलशाली हैं ऐसा नहीं कहा गया है|
(घ) 4
फूलों के बारे में काव्यांश में कहा गया है कि उन्होंने पाना रूप-स्वरुप स्वयं ही सँवारा है|
(ङ) 1
सबने अपने अहंकार में जड़ को भुला दिया इसी बात को लेकर जड़ मुस्कुराती है क्योंकि अपनी मजबूती के बल पर उसने वृक्ष के सभी भागों को संभाल रखा है|
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