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निर्देशानुसार उत्तर लिखिए-

क) वे उन सब लोगों से मिले, जो मुझे जानते थे । (सरल वाक्य)


ख) पंख वाले चींटे या दीमक वर्षा के दिनों में निकलते हैं। (वाक्य का भेद लिखिए)


ग) आषाढ़ की एक सुबह एक मोर ने मल्हार के मियाऊ-मियाऊ को सुर दिया था।


(संयुक्त वाक्य में बदलिए)

क) वह मुझे जानने वाले सभी लोगों से मिला|

ख) सरल वाक्य सा वाक्य जिसमे एक ही क्रिया एवं एक ही कर्ता होता है या जिस वाक्य में एक ही उद्देश्य एवं एक ही विधेय होता है, वे वाक्य सरल वाक्य कहलाते हैं।


ग) आषाढ़ की एक सुबह थी और उस दिन एक मोर ने मल्हार के मियाऊ को सुर दिया था|


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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए

एक दिन तने ने भी कहा था,


ज़ड़ ? जड़ तो ज़ड़ ही है;


जीवन से सदा डरी रही है,


और यही है उसका सारा इतिहासकि जमीन में मुँह गड़ाए पड़ी रही है;


लेकिन मैं जमीन से ऊपर उठा,


बाहर निकला, बढ़ा हूँ,


मज़बूत बना हूँ, इसी से तो तना हूँ,


एक दिन डालों ने भी कहा था, तना?


किस बात पर है तना?


जहाँ बिठाल दिया गया था वहीं पर है बना;


प्रगतिशील जगती में तिल-भर नहीं डोला है


खाया है, मोटाया है, सहलाया चोला है;


लेकिन हम तने से फूटी, दिश-दिशा में गयीं


ऊपर उठीं, नीचे आयीं


हर हवा के लिए दोल बनीं, लहराईं,


इसी से तो डाल कहलाई।


(पत्तियों ने भी ऐसा ही कुछ कहा , तो....)


एक दिन फूलों ने भी कहा था,


पत्तियाँ ? पत्तियों ने क्या किया?


संख्या के बल पर डालों को छाप लिया,


डालों के बल पर ही चल-चपल रही हैं,


हवाओं के बल पर ही मचल रही हैं?


लेकिन हम अपने से खुले, खिले, फूले हैं-


रंग लिए, रस लिए, पराग लिए –


हमारी यश-गंध दूर-दूर-दूर फैली है,


भ्रमरों ने आकर हमारे गुन गाए हैं,


हम पर बौराए हैं ।सब की सुन पाई है, जड़ मुसकाई है !


(क) तने का जड़ को जड़ कहने से क्या अधिप्राय है?


1. मज़बूत है


2. समझदार है


3. मूर्ख है


4. उदास है


(ख) डालियों ने तने के अहंकार को क्या कहकर चूर-चूर कर दिया?


1. जड़ नीचे है तो यह ऊपर है


2. यों ही तना रहता है


3. उसका मोटापा हास्यास्पद है


4 प्रगति के पथ पर एक कद़म भी नहीं बढ़ा


(ग) पत्तियों के बारे में क्या नहीं कहा गया है ?


1. संख्या के बल से बलवान् है


2. हवाओं के बल पर डोलती हैं


3. डालों के कारण चंचल हैं


4. सबसे बलशाली हैं


(घ) फूलों ने अपने लिए क्या नहीं कहा ?


1. हमारे गुणों का प्रचार-प्रसार होता है


2. दूर-दूर तर हमारी प्रशंसा होती है


3. हम हवाओं के बल पर झूमते हैं


4. हमने अपना रूप-स्वरूप खु ही सँवारा है


(ङ) जड़ कयों मुसकराई?


1. सबने अपने अहंकार में उसे भुला दिया


2. फूलों ने पत्तियो को भुला दिया


3. पत्तियों ने डालियों को भूला दिया


4. डालियों ने तने को भुला दिया

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निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए-

ओ देशवासियों, बैठ न जाओ पत्थर से,


ओ देशवासियो, रोओ मत तुम यों निर्झर से,


दरख्यास्त करें, आओ, कुछ अपने ईश्वर से


वह सुनता है ग़मज़दों और रंजीदों को।


जब सार सरकता-सा लगता जग-जीवन से


अभिषिक्त करें, आओ, अपने को इस प्राण से-


हम कभी न मिटने देंगे भारत के मन से


दुनियां ऊँचे आदर्शों की, उम्मीदों की


साधना एक युग-युग अंतर में ठनी रहे य


यह भूमि बुद्ध-बापू से सुत की जनी रहें


प्रार्थना एक युग-युग पृथ्वी पर बनी रहे


(क) कवि देशवासियों को क्या कहना चाहता है ?


1) निराशा और जड़ता छोड़ों


2) जागो, आगे बढो


3) पढ़ों, लिखों, कुछ करो


4) डरो मत, ऊँचे चढ़ो


(ख). कवि किसकी और किससे प्रार्थना की बात कर रहा है ?


1. भगवान और जनता


2. दुखी लोग और ईश्वर


3. देशवासी और सरकार


4. युवा वर्ग और ब्रिटिश सत्ता


(ग). कवि भारतीयों को कौन-सा संकल्प लेने का कहता है?


1. हम भारत को कभी न मिटने देंगे


2. जीवन में सार-तत्व को बनाए रखेंगे


3. उच्च आदर्श और आशा के महत्व को बनाए रखेंगे


4. जग-जीवन को समरसता से अभिषिक्त करेंगे


(घ) ‘यह भूमि बुद्ध-बापू से सुत की जनी रहे’- का भाव है


1. इस भूमि पर बुद्ध और बापू ने जन्म लिया


2. इस भूमि पर बुद्ध और बापू जैसे लोग जन्म लेते रहें


3. यह धरती बुद्ध और बापू जैसी है


4. यह धऱती बुद्ध और बापू को हमेशा याद रखेगी


(ङ) कवि क्या प्रार्थना करता है?


1. योगी, संत और शहीदों का हम सब सम्मान करें


2. युगों-युगों तक यह धरती बनी रहे


3. धरती माँ का वंदन करते रहें


4. भारतीयों में योगी, संत और शहीद अवतार लेते रहें

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निर्देशानुसार वाच्य परिवर्तन कीजिएः

क) फुरसत में मैना ख़ूब रियाज़ करती है। (कर्मवाच्य में)


ख) फाख्ताओं द्वारा गीतों को सुर दिया जाता है। (कर्तृवाच्य में)


ग) बच्चा साँस नहीं ले पा रहा था । (भाववाच्य)


घ) दो-तीन पक्षियों द्वारा अपनी-अपनी लय में एक साथ कूदा जा रहा था। (कर्तवाच्य में)

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निम्नलिखित रेखांकित पदों का पद-परिचय दीजिए

मनुष्य केवल भोजन करने के लिए जीवित नहीं रहता है, बल्कि वह अपने भीतर की सूक्ष्म इच्छाओं की तृप्ति भी चाहता है।