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निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिन्दुओं के आधार पर लगभग 250 शब्दों में निबन्ध लिखिए-

क) विज्ञापन की दुनिया


• विज्ञापन का युग


• भ्रमजाल और जानकारी


• सामाजिक दायित्व


ख) भ्रष्टाचार मुक्त समाज


• भ्रष्टाचार क्या है


• सामाजिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार


• कारण और निवारण


ग) पी. वी. सिंधु- मेरी प्रिय खिलाड़ी


• अभ्यास और परिश्रम


• जुझारूपन और आत्मविश्वास


• धैर्य और जीत का सेहरा

क) विज्ञापन समाज एवं व्यापार जगत् में होने वाले परिवर्तन को प्रदर्शित करने वाला उद्योग है, जो बदलते समय के साँचे में तेजी से ढल जाता है। विज्ञापन, उपभोक्ताओं को शिक्षित एंव प्रभावित करने के दृष्टिकोण से निर्माताओं, थोक विक्रेताओं और खुदरा विक्रेताओं की ओर से विचारों, उत्पादों और सेवाओं से संबंधित संदेशों का अव्यक्तिगत संचार है| विज्ञापन को मुद्रित, ऑडियो अथवा वीडियो किसी भी रूप में जारी किया जा सकता है| वर्तमान में तो इन्टरनेट का दौर है और इस दौर में तो अब सोशल मीडिया भी विज्ञापन जारी करने का एक बहुत बड़ा साधन बन गया है| इनके अतिरिक्त होर्डिंग्स, बिलबोर्ड्स, पोस्टर्स इत्यादि का प्रयोग भी विज्ञापन के लिए किया जाता है| जूते-चप्पल से लेकर लिपस्टिक, पाउडर एंव दूध-दही यानी दुनिया की ऐसी कौन सी चीज है जिसका विज्ञापन किसी न किसी रूप में कहीं प्रसारित या प्रकाशित न होता हो| इन उत्पादों के विज्ञापन के माध्यम से इन उत्पादों के प्रचार-प्रसार और इन्हें बेचने में आसानी रहती है| वर्तमान में विवाह के लिए वर या वधू की तलाश हेतु भी विज्ञापन प्रकाशित एंव प्रसारित होते हैं|


एक ओर हमारे जीवन में पुस्तकें, पत्रिकाएँ, समाचार-पत्र जैसे प्रिण्ट मीडिया के साधनों की भरमार है, तो दूसरी ओर हम घर से बाहर तक रेडियो, टेलीविज़न, सिनेमा, कम्प्यूटर, मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अत्याधुनिक साधनों से घिरे हुए हैं, किन्तु यदि हम कहे कि मीडिया के इन सारे साधनों पर सर्वाधिक आधिपत्य विज्ञापन का है, तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा, क्योंकि विज्ञापन इनकी आय का एक मुख्य स्रोत होने के साथ-साथ पूरे संचार तन्त्र पर अपना गहरा प्रभाव भी छोड़ता है। विज्ञापनों के अन्य अनेक लाभ भी हैं जैसे-यह उत्पादों, मूल्यों, गुणवत्ता, बिक्री संबंधी जानकारियों, विक्रय उपरान्त सेवाओं के बारे में उपभोक्ताओं को जानकारी उपलब्ध कराता है, नए उत्पादों के प्रस्तुतीकरण, वर्तमान उत्पादों के उपभोक्ताओं को बनाए रखने और नए उपभोक्ताओं को आकर्षित कर अपनी बिक्री बढ़ाने में कंपनियों एवं विक्रेताओं की मदद करता है| विज्ञापन उपभोक्ताओं एवं विक्रेताओं दोनों के जीवन को आसान बनाने के कार्य करते हैं| वर्तमान में किसी उत्पाद के प्रचार-प्रसार एवं व्यापार में वृद्धि का सबसे ससक्त साधन विज्ञापन ही है| उदाहरण के तौर पर- मैगी, साबुन, शैम्पू, मोबाइल जैसे उत्पादों में वृद्धि का कारण इनके रचनात्मक विज्ञापन ही हैं और वर्तमान समय का सच भी यही है कि आज किसी भी उत्पाद के प्रचार-प्रसार का सबसे प्रभावशाली माध्यम विज्ञापन ही है| वर्तमान में केवल व्यावसायिक लाभों के लिए ही कंपनियों द्वारा विज्ञापनों का प्रसारण या प्रकाशन नहीं किया जाता| वर्तमान में विज्ञापन का उपयोग समाज के अन्य हितधारक जैसे- राजनीतिक दल भी अपने विचारों एवं योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विज्ञापन का सहारा लेते हैं| इस तरह, चुनावों के समय लोकमत के निर्माण में भी विज्ञापनों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है| कभी-कभी विज्ञापन हमारे सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों को भी क्षति पहुँचाता है। भारत में पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव एवं उपभोक्तावादी संस्कृति के विकास में विज्ञापनों का भी हाथ है विज्ञापन से होने वाली एक और हानि यह है कि विज्ञापनदाताओं का खुलासा करने से जनसंचार अथवा मीडिया की लोग परहेज करते हैं क्योंकि विज्ञापन उनकी आय के प्रमुख साधन होते हैं|


विज्ञापन व्यापार, जनसाधारण तक सुचना पहुँचाने एवं अन्य क्षेत्रों में बहुत उपयोगी सिद्ध हुए हैं लेकिन इसके साथ ही इससे समाज में कुछ गलत प्रवार्तियाँ भी बढ़ी हैं जैसे गलत जानकारी फैलाना, गलत सूचनाएँ प्रसारित करना आदि| अतः हमें गलत विज्ञापनों से सजग रहना चाहिए और सही विज्ञापनों को प्रेरित करना चाहिए|


ख) भ्रष्टाचार अर्थात भ्रष्ट + आचार। भ्रष्ट यानी बुरा या बिगड़ा हुआ तथा आचार का मतलब है आचरण। अर्थात भ्रष्टाचार का शाब्दिक अर्थ है वह आचरण जो किसी भी प्रकार से अनैतिक और अनुचित हो।


भारत एवं दुनिया के अन्य देशों द्वारा वर्तमान में कई स्तरों पर भ्रष्टाचार की समस्या का सामना करना पड़ रहा है| यह समस्या हमारे देश को अन्दर ही अन्दर से खोखला कर रही है| यही समय है जब देश के प्रत्येक नागरिक को देश को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही इस समस्या को महसूस करना चाहिए और इसके निराकरण के प्रयास करने चाहिए| अगर इस समस्या के प्राति देश के सभी नागरिक जागरूक नहीं हुए और हमने इसके निराकरण के गंभीर रूप से प्रयास नहीं किये तो एक दिन हम भी इस कुचक्र में फंसकर दोबार से गुलामी का जीवन जीने को मजबूर हो जायेंगे|


भ्रष्टाचार एक बीमारी की तरह है। आज भारत देश में भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा है। इसकी जड़े तेजी से व्यवस्था एवं समाज में फैल रही है। यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो यह पूरे देश को अपनी चपेट में ले लेगा। भ्रष्टाचार का प्रभाव अत्यंत व्यापक है। भ्रष्टाचार के कई रंग-रूप है जैसे रिश्वत, काला-बाजारी, जान-बूझकर दाम बढ़ाना, पैसा लेकर काम करना, सस्ता सामान लाकर महंगा बेचना आदि। भ्रष्टाचार के कई कारण है। जैसे असंतोष, असमानता, आर्थिक, सामाजिक या सम्मान, पद -प्रतिष्ठा के कारण भी व्यक्ति अपने आपको भ्रष्ट बना लेता है। हीनता और ईर्ष्या की भावना से शिकार हुआ व्यक्ति भ्रष्टाचार को अपनाने के लिए विवश हो जाता है। साथ ही रिश्वतखोरी, भाई-भतीजावाद आदि भी भ्रष्टाचार को जन्म देते हैं।


भारत में सरकार और राजनीतिक दल अपने भ्रष्ट तरीकों के लिए जाने जाते हैं। भ्रष्ट प्रथाओं में लिप्त होने की बजाए उन्हें भ्रष्टाचार की समस्या पर काबू पाने के लिए काम करना चाहिए। उन्हें नागरिकों के लिए एक उदाहरण तैयार करना चाहिए और भ्रष्ट तरीकों से काम करने के बजाए उन्हें अपने लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करने के लिए उन्हें प्रेरित करना चाहिए।


यह एक संक्रामक रोग की तरह है। व्यवस्था एवं समाज में यह कई स्तरों पर फ़ैल गया है| इसके निराकरण के लिए सख्त कानून एवं सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए| भरष्टाचार में लिप्त लोगों को कड़ी सजा देकर ही एक उदहारण पेश किया जा सकता है और तभी इस पर लगाम लगेगी| अन्यथा तो इस बीमारी की जड़ें समाज एवं व्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र में फ़ैल चुकी हैं|


उपसंहार- भ्रष्टाचार हमारे नैतिक जीवन मूल्यों पर सबसे बड़ा प्रहार है। भ्रष्टाचार से लड़ने के वजाय वर्तमान समाज में इसकी स्वीकार्यता बढ़ती जा रहे है और अब तो इसकी नैतिकता पर प्रश्न भी नहीं उठते| अगर ऐसा ही चलता रहा तो रहा तो एक दिन ऐसा आएगा जब भ्रष्टाचार रुपी यह बीमारी हमारे समाज एवं राष्ट्र को निगल जायेगी|


ग) पी. वी. सिंधु का पूरा नाम पुर्सला वेंकटा सिन्धु है यह एक भारतीय प्रोफेशनल बैडमिंटन खिलाडी है। 2016 के समर ओलंपिक्स में ओलंपिक्स सिल्वर मेडल जीतने वाली वह पहली महिला भारतीय बैडमिंटन खिलाडी बनी। जो ओलंपिक्स फाइनल तक पहुंची। और ओलंपिक्स के एकल में बैडमिंटन में सिल्वर जीतने वाली वह सबसे कम उम्र की खिलाडी है।


पुरसला वेंकटा सिन्धु का जन्म एक तेलगु परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम पी.वी. रमण और माता का नाम पी. विजया था जब सिन्धु के माता-पिता प्रोफेशनल वॉलीबॉल खेल रहे थे तभी सिन्धु ने बैडमिंटन खेलने का निर्णय लिया| पी. व्ही. सिन्धु ने पहले महबूब अली के प्रशिक्षण में इस खेल की मूलभूत जानकारियाँ हासिल की और सिकंदराबाद के भारतीय रेल्वे के इंस्टिट्यूट में ही उन्होंने अपने प्रशिक्षण की शुरुआत की। इसके तुरंत बाद सिन्धु पुल्लेला गोपीचंद बैडमिंटन अकैडमी में शामिल हो गई।


पी. व्ही. सिन्धु के घर से उनके प्रशिक्षण लेने की जगह तक़रीबन 56 किलोमीटर दूर थी, लेकिन यह उनकी अपार इच्छा और जीतने की चाह ही थी जिसके लिये उन्होंने कठिन परिश्रम किया था। अपने कठिन परिश्रम की बदौलत ही आज वह एक सफल बैडमिंटन खिलाडी बन पाई।


अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सिन्धु ने अनेक बड़ी-बड़ी प्रतियोगिताओं में भारत की ओर से खेलते हुए अनेक पदक हासिल किये हैं| बैडमिंटन में उन्होंने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन किया है| अपने खेल के दम पर ही आज उन्होंने अपने एवं अपने राष्ट्र के नाम को दुनिया के फलक पर रखा है और आज बैडमिंटन के खेल में पी.व्ही. एक जाना पहचाना नाम हैं|


उनका बैडमिंटन के प्रति समर्पण उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है उनका आत्मविश्वास देखते ही बनता है वह इस बात का जीता जागता उदहारण हैं की कठोर परिश्रम एवं आत्मविश्वास से जीवन में कुछ भी जासिल करना मुमकिन है क्योंकि उन्होंने ऐसा करके राष्ट्र एवं समाज के सामने एक उदाहरण पेश किया है और इन सभी खूबियों के कारण ही वह मेरी प्रिय खिलाड़ी है|


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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए-

क) ‘कन्यादान’ कविता में माँ ने बेटी को अपने चेहरे पर न रीझने की सलाह क्यों दी है ?


ख) माँ का कौन-सा दुख प्रामाणित था, कैसे?


ग) ‘जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण’- कथन में कवि की वेदना और चेतना कैसे व्यक्त हो रही है?


घ) ‘धनुष को तोड़ने वाला कोई तुम्हारा दास होगा’- के आधार पर राम के स्वभाव पर टिप्पणी किजिए।


ङ) काव्यांश के आधार पर परशुराम के स्वभाव की दो विशेषताओं पर सोदाहरम टिप्पणी कीजिए।

13

‘आप चैन की नींद सो सकें इसीलिए तो हम यहाँ पहरा दे रहे हैं’- एक फ़ौजी के इस कथन पर जीवन-मूल्यों की दृष्टि से चर्चा कीजिए।

15

अपनी दादी की चित्र-प्रदर्शनी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखते हुए उन्हें बधाई-पत्र लिखिए।

अथवा


अपनी योग्यताओं का विवरण देते हुए प्राथमिक शिक्षक के पद के लिए अपने जिले के शिक्षा-अधिकारी को आवेदन पर लिखिए।

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निम्नलिखित गद्यांश का शीर्षक लिखकर एक-तिहाई शब्दों में सार लिखिएः

ऐसा कोई दिन आ सकता जबकि मनुष्य के नाखूनों का बढ़ना बंद हो जाएगा। प्रणिशास्त्रियों का ऐसा अनुमान है कि मनुष्य क यह अनावश्यक अंग उसी प्रकार झ़ड़ जाएगा, जिस प्रकार उसकी पूँछ झड़ गई है। उस दिन मनुष्य की पशुत भी लुप्त हो जाएगी। शायद उस दिन वह मारणास्त्रों का प्रयोग भी बंद कर देगा। तब तक इस बात सेछोटे बच्चों को परिचित करा देना वांछनीय जान पड़ता है कि ऩाखून का बढ़ना मनुष्य के भीतर की पशुता की निशानी है और उसे नहीं बढ़ने देना मनुष्य की अपनी इच्छा है, अपना आदर्श है। बृहतर जीवन में अस्त्र-शस्त्रों को बढ़ने देना मनुष्य की पशुता की निशानी है और उनकी बाढ को रोकना मनुष्यत्व का तक़ाजा। मनुष्य में जो घृणा है, जो अनायास-बिना सिखाए-आ जाती है, वह पशुत्व का घोतक है और अपने को संयत रखना, दूसरों के मनोभावों का आतर करना मनुष्य का स्वधर्म है। बच्चे यह जानें तो अच्छा हो कि अभ्यास और तप से प्राप्त वस्तुएँ मनुष्य की महिमा को सूचित करती हैं।