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अपनी दादी की चित्र-प्रदर्शनी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखते हुए उन्हें बधाई-पत्र लिखिए।

अथवा


अपनी योग्यताओं का विवरण देते हुए प्राथमिक शिक्षक के पद के लिए अपने जिले के शिक्षा-अधिकारी को आवेदन पर लिखिए।

सेक्टर 32, नॉएडा(उत्त प्रदेश)


रजत शर्मा,


दिनांक- 12.10.19


आदरणीय दादीजी,


सादर प्रणाम,


मैं यहाँ कुशलता से हूँ तथा आपके और दादाजी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूँ| मैंने आपकी चित्र-प्रदर्शनी देखी आपका हुनर भगवान की देन है आप एक बहुत सच्ची कलाकार हैं| आपने उम्र के इस पड़ाव में भी अपनी कला को जीवित रखा है। आपके चित्र देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो वे बात करना चाहते हों और अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करना चाहते हो|


चित्र प्रदर्शनी में आपके द्वारा पेश किये गए चित्रों में आपका स्वभाव एवं आपकी भावनाएँ झलकती हैं| उम्मीद है आप इस कला को खुदसे कभी दूर नहीं होने देंगी एवं हमारी प्रेरणा श्रोत बनी रहेंगी|


आपको चित्र-प्रदर्शनी के सफल होने की बहुत बहुत बधाई मैं आपके जवाब की प्रतीक्षा करूँगा|


आपको एवं परिवार को मेरा सादर चरण स्पर्श|


आपकी प्यारा पोता,


रजत


अथवा


सेवा में,


जिला शिक्षा अधिकारी


जबलपुर(मध्य प्रदेश),


दिनांक-5 फरवरी 2019


विषय-प्राथमिक शिक्षक के पद के लिए आवेदन-पत्र


मान्यवर,


मैंने 16 जनवरी के दैनिक भास्कर अखबार में प्राथमिक शिक्षक के पद के लिए आवेदन से संबंधित विज्ञापन देखा| मैं बचपन से ही एक शिक्षक बनना चाहता था और पढाई के दौरान शिक्षण में ही रूचि भी लेता रहा और इसी कारण से मैं उस दौरान मोहल्ले के बच्चों को पढ़ाता रहा|


मैंने विज्ञान मैं स्नातक किया है और शिक्षक बनने के लिए शिक्षण की ट्रैनिंग B.Ed भी किया है| इस पद के लिए आवेदन में वर्णित सभी योग्यताएं मेरे पास है साथ ही मैं शिक्षक बनने के लिए पूरे मन से समर्पित भी हूँ|


अतः मैं प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक के पद हेतु अपना आवदेन आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ कृपया मेरे आवदेन को स्वीकार करें और अगर मैं योग्य हूँ तो मुझे शिक्षक बनने का मौका दें| आप मुझे यह मौका देकर निराश नहीं होंगे|


मैं आपकी इस कृपा के लिए सादा आभारी रहूँगा|


धन्यवाद


प्रार्थी


शिवम् कुमार


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‘आप चैन की नींद सो सकें इसीलिए तो हम यहाँ पहरा दे रहे हैं’- एक फ़ौजी के इस कथन पर जीवन-मूल्यों की दृष्टि से चर्चा कीजिए।

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निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिन्दुओं के आधार पर लगभग 250 शब्दों में निबन्ध लिखिए-

क) विज्ञापन की दुनिया


• विज्ञापन का युग


• भ्रमजाल और जानकारी


• सामाजिक दायित्व


ख) भ्रष्टाचार मुक्त समाज


• भ्रष्टाचार क्या है


• सामाजिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार


• कारण और निवारण


ग) पी. वी. सिंधु- मेरी प्रिय खिलाड़ी


• अभ्यास और परिश्रम


• जुझारूपन और आत्मविश्वास


• धैर्य और जीत का सेहरा

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निम्नलिखित गद्यांश का शीर्षक लिखकर एक-तिहाई शब्दों में सार लिखिएः

ऐसा कोई दिन आ सकता जबकि मनुष्य के नाखूनों का बढ़ना बंद हो जाएगा। प्रणिशास्त्रियों का ऐसा अनुमान है कि मनुष्य क यह अनावश्यक अंग उसी प्रकार झ़ड़ जाएगा, जिस प्रकार उसकी पूँछ झड़ गई है। उस दिन मनुष्य की पशुत भी लुप्त हो जाएगी। शायद उस दिन वह मारणास्त्रों का प्रयोग भी बंद कर देगा। तब तक इस बात सेछोटे बच्चों को परिचित करा देना वांछनीय जान पड़ता है कि ऩाखून का बढ़ना मनुष्य के भीतर की पशुता की निशानी है और उसे नहीं बढ़ने देना मनुष्य की अपनी इच्छा है, अपना आदर्श है। बृहतर जीवन में अस्त्र-शस्त्रों को बढ़ने देना मनुष्य की पशुता की निशानी है और उनकी बाढ को रोकना मनुष्यत्व का तक़ाजा। मनुष्य में जो घृणा है, जो अनायास-बिना सिखाए-आ जाती है, वह पशुत्व का घोतक है और अपने को संयत रखना, दूसरों के मनोभावों का आतर करना मनुष्य का स्वधर्म है। बच्चे यह जानें तो अच्छा हो कि अभ्यास और तप से प्राप्त वस्तुएँ मनुष्य की महिमा को सूचित करती हैं।

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निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-

क) जब सावन-भादों आत हैं तब दर्जिन की आवाज़ पूरे इलाक़े में गूँजती है।


(सरल वाक्य में बदलिए)


ख) भुजंगा शाम को तार पर बैठकर पतिंगों को पकड़ता रहता है।


(मिश्र वाक्य में बदलिए)


ग) अँधेरा होते-होते चौदह घंटों बाद कूजन-कुंज का दिन ख़त्म हो जाता है।


(संयुक्त वाक्य में बदलिए)