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निम्नलिखित रेखांकित पदों का पद-परिचय दीजिए

मनुष्य केवल भोजन करने के लिए जीवित नहीं रहता है, बल्कि वह अपने भीतर की सूक्ष्म इच्छाओं की तृप्ति भी चाहता है।

मनुष्य- जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग , एक वचन, कर्ताकारक

वह- पुरुष वाचक सर्वनाम, पुल्लिंग , एक वचन, कर्ताकारक


सूक्ष्म- विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन


चाहता है- सकर्मक क्रिया, एक वचन, पुल्लिंग, एकवचन


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निर्देशानुसार उत्तर लिखिए-

क) वे उन सब लोगों से मिले, जो मुझे जानते थे । (सरल वाक्य)


ख) पंख वाले चींटे या दीमक वर्षा के दिनों में निकलते हैं। (वाक्य का भेद लिखिए)


ग) आषाढ़ की एक सुबह एक मोर ने मल्हार के मियाऊ-मियाऊ को सुर दिया था।


(संयुक्त वाक्य में बदलिए)

6

निर्देशानुसार वाच्य परिवर्तन कीजिएः

क) फुरसत में मैना ख़ूब रियाज़ करती है। (कर्मवाच्य में)


ख) फाख्ताओं द्वारा गीतों को सुर दिया जाता है। (कर्तृवाच्य में)


ग) बच्चा साँस नहीं ले पा रहा था । (भाववाच्य)


घ) दो-तीन पक्षियों द्वारा अपनी-अपनी लय में एक साथ कूदा जा रहा था। (कर्तवाच्य में)

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क) निम्नलिखित काव्यांशों को पढ़कर उनमें निहित रस पहचानकर लिखिएः

1. उपयुक्त उस खल को यद्यपि मृत्यु का भी दंड है,


पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दंड और प्रचंड हैं।


अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ है।


तो सत्य कहता हूँ कभी शस्तास्त्र फिर धारूँ न मैं


2. वह आता-


दो टूक कलेजे के करता पछताता प


पथ पर आता


पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक,


चल रहा लटुटिया टेक


(ख) 1. श्रृंगार रस का स्थायी भाव लिखिए ।


2) निम्नलिखित काव्यांश में स्थायी भाव क्या है?


कब द्वै दाँत दूध कै देखों, कब तोतै, मुख बचन झरैं।


कब नंदहिं बाबा कहि बोले, कब जननी कहि मोहिं ररै।

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिएः

पुराने जमाने में स्त्रियों के लिए कोई विश्वविद्यालय न था। फिर नियमबद्ध प्रणाणी का उल्लेख आदि पुराणों में न मिले तो क्या आश्चर्य ? और, उल्लेख उसका कहीं रहा हो, पर न्ष्ट ह गया हो तो ? पुराने जमाने में विमान उड़ते थे। बताइए उनके बनाने की विद्या सिखाने वाला कोई शास्त्र ! बड़े-बड़े जहाज़ों पर सवार होकर लोग द्वीपांतरों को जाते थे। दिखाइए, जहाज बनाने की नियमबद्ध प्रणाली के दर्शक ग्रंथ! पुराणवादि में वमानों और जह़ाजों द्वरा की गई यात्राओं के हवाले देखकर उनका अस्तित्व तो हम बड़े गर्व से स्वीकार करते हैं, परंतु पुराने ग्रंथों में अनेक प्रगल्भ पंडिताओं के नामोल्लेख देखकर भी कुछ लोग भारत की तत्कालीन स्त्रियों को मूर्ख, अपढ़ और गँवार बताते हैं ।


क) पुराणों में नियमबद्ध शिक्षा-प्रणाली न मिलने पर लेखक आश्चर्य क्यों नहीं मानता?


ख) जहाज़ बनाने के कोई ग्रंथ न होने या न मिलने पर लेखक क्या बताना चहता है?


ग) शिक्षा की नियमावली का न मिलना, स्त्रियों की अपढ़ता का सबूत क्यों नहीं है?