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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए-

क) मन्नू भंडारी ने अपनी माँ के बारे में क्या कहा है?


ख) अंतिम दिनों में मन्नू भंडारी के पिता का स्वभाव शक्की हो गया था, लेखिका ने इसके क्या कारण दिए?


ग) बिस्समिल्ला खाँ को खुदा के प्रति क्या विश्वास है ?


घ) काशी में अभी-भी क्या शेष बचा हुआ है ?


ङ) कौसल्यायन जी के अनुसार सभ्यता के अंतर्गत क्या-क्या समाहित है ?

क) मन्नू भंडारी ने अपनी माँ के बारे में निम्नलिखित कहा है- लेखिका के अनुसार उनकी माँ का स्वयं का कोई अस्तित्व नहीं था| उनकी माँ हमेशा उनके पिता के गुस्से एवं कोप को झेलती रही, उनका जीवन सिर्फ अपने परिवार तक सीमिते था और इसीलिये लेखिका की माँ लेखिका के लिए आदर्श पात्र नहीं रहीं|

ख) अंतिम दिनों में मन्नू भंडारी के पिता का स्वभाव शक्की इसलिए होगया था क्योंकि उनके पिताजी ने सभी के बुरे वक्त में उनका साथ दिया परन्तु जब’ उनका बुरा वक्त आया तब किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया एवं और इस कारण वह अकेले रह गए। इन्हीं सब कारणों की वजह से लेखिका के पिता का स्वभाव शक्की हो गया था|


ग) बिस्समिल्ला खाँ को खुदा के प्रति विश्वास है की वह उन्हें सच्चा सुर देंगे| वह प्रतिदिन खुदा से पांचो वक्त की नमाज़ में सच्चे सुर की प्राथना करते है ऐसा सुर जो हर इंसान के दिल तो छूजाए|


घ) काशी में अभी-भी गंगा मैया, बाबा विश्वनाथ तथा बालाजी का मंदिर शेष बचा हुआ है।


ङ) कौसल्यायन जी के अनुसार सभ्यता के अंतर्गत निम्नलिखित बाते समाहित होती हैं- हमारे खाने पीने का ढंग, पहनने ओढने का तरीका, यातायात के साधन, एक दूसरे के प्रति व्यवहार का तरीका आदि।


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क) निम्नलिखित काव्यांशों को पढ़कर उनमें निहित रस पहचानकर लिखिएः

1. उपयुक्त उस खल को यद्यपि मृत्यु का भी दंड है,


पर मृत्यु से बढ़कर न जग में दंड और प्रचंड हैं।


अतएव कल उस नीच को रण-मध्य जो मारूँ है।


तो सत्य कहता हूँ कभी शस्तास्त्र फिर धारूँ न मैं


2. वह आता-


दो टूक कलेजे के करता पछताता प


पथ पर आता


पेट पीठ दोनों मिलकर हैं एक,


चल रहा लटुटिया टेक


(ख) 1. श्रृंगार रस का स्थायी भाव लिखिए ।


2) निम्नलिखित काव्यांश में स्थायी भाव क्या है?


कब द्वै दाँत दूध कै देखों, कब तोतै, मुख बचन झरैं।


कब नंदहिं बाबा कहि बोले, कब जननी कहि मोहिं ररै।

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निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिएः

पुराने जमाने में स्त्रियों के लिए कोई विश्वविद्यालय न था। फिर नियमबद्ध प्रणाणी का उल्लेख आदि पुराणों में न मिले तो क्या आश्चर्य ? और, उल्लेख उसका कहीं रहा हो, पर न्ष्ट ह गया हो तो ? पुराने जमाने में विमान उड़ते थे। बताइए उनके बनाने की विद्या सिखाने वाला कोई शास्त्र ! बड़े-बड़े जहाज़ों पर सवार होकर लोग द्वीपांतरों को जाते थे। दिखाइए, जहाज बनाने की नियमबद्ध प्रणाली के दर्शक ग्रंथ! पुराणवादि में वमानों और जह़ाजों द्वरा की गई यात्राओं के हवाले देखकर उनका अस्तित्व तो हम बड़े गर्व से स्वीकार करते हैं, परंतु पुराने ग्रंथों में अनेक प्रगल्भ पंडिताओं के नामोल्लेख देखकर भी कुछ लोग भारत की तत्कालीन स्त्रियों को मूर्ख, अपढ़ और गँवार बताते हैं ।


क) पुराणों में नियमबद्ध शिक्षा-प्रणाली न मिलने पर लेखक आश्चर्य क्यों नहीं मानता?


ख) जहाज़ बनाने के कोई ग्रंथ न होने या न मिलने पर लेखक क्या बताना चहता है?


ग) शिक्षा की नियमावली का न मिलना, स्त्रियों की अपढ़ता का सबूत क्यों नहीं है?

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निम्निलिखित काव्यांश के आधार पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए

तार सप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला


प्रेऱणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ


आवाज से राख जैसा कुछ गिरता हुआ


तभी मुख्य गायक को ढाढ़स बाँधता


कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर


कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ


क) ‘बैठने लगता है उसका गला’ का क्या आशय है?


ख) मुख्य गायक को ढाढ़स कौन बँधाता है और क्यों ?


ग) तार सप्तक क्या है?

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए-

क) ‘कन्यादान’ कविता में माँ ने बेटी को अपने चेहरे पर न रीझने की सलाह क्यों दी है ?


ख) माँ का कौन-सा दुख प्रामाणित था, कैसे?


ग) ‘जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण’- कथन में कवि की वेदना और चेतना कैसे व्यक्त हो रही है?


घ) ‘धनुष को तोड़ने वाला कोई तुम्हारा दास होगा’- के आधार पर राम के स्वभाव पर टिप्पणी किजिए।


ङ) काव्यांश के आधार पर परशुराम के स्वभाव की दो विशेषताओं पर सोदाहरम टिप्पणी कीजिए।