निम्नलिखित गद्यांश का शीर्षक लिखकर एक-तिहाई शब्दों में सार लिखिएः
ऐसा कोई दिन आ सकता जबकि मनुष्य के नाखूनों का बढ़ना बंद हो जाएगा। प्रणिशास्त्रियों का ऐसा अनुमान है कि मनुष्य क यह अनावश्यक अंग उसी प्रकार झ़ड़ जाएगा, जिस प्रकार उसकी पूँछ झड़ गई है। उस दिन मनुष्य की पशुत भी लुप्त हो जाएगी। शायद उस दिन वह मारणास्त्रों का प्रयोग भी बंद कर देगा। तब तक इस बात सेछोटे बच्चों को परिचित करा देना वांछनीय जान पड़ता है कि ऩाखून का बढ़ना मनुष्य के भीतर की पशुता की निशानी है और उसे नहीं बढ़ने देना मनुष्य की अपनी इच्छा है, अपना आदर्श है। बृहतर जीवन में अस्त्र-शस्त्रों को बढ़ने देना मनुष्य की पशुता की निशानी है और उनकी बाढ को रोकना मनुष्यत्व का तक़ाजा। मनुष्य में जो घृणा है, जो अनायास-बिना सिखाए-आ जाती है, वह पशुत्व का घोतक है और अपने को संयत रखना, दूसरों के मनोभावों का आतर करना मनुष्य का स्वधर्म है। बच्चे यह जानें तो अच्छा हो कि अभ्यास और तप से प्राप्त वस्तुएँ मनुष्य की महिमा को सूचित करती हैं।
मनुष्यों में नाखूनों का बढ़ना उसके भीतर पशुता की निशानी है| अस्त्र-शास्त्रों को लगातर बढ़ावा देना जोकि मानवता के लिए खतरा हैं पशुता की निशानी है जबकि उनके बढ़ने पर रोक लगाना मानवता की निशानी है| मनुष्य को अपने ऊपर संयम रखना, दूसरों के मनोभावों का आदर करना एवं बेहतर कर्म करना मनुष्य का स्वधर्म है और प्रत्यके मनुष्य को इसे निभाना चाहिए तभी यह पृथ्वी एवं मनुष्यता जीवित रह पाएगी|
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