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निर्देशानुसार उत्तर दीजिए-

क) जब सावन-भादों आत हैं तब दर्जिन की आवाज़ पूरे इलाक़े में गूँजती है।


(सरल वाक्य में बदलिए)


ख) भुजंगा शाम को तार पर बैठकर पतिंगों को पकड़ता रहता है।


(मिश्र वाक्य में बदलिए)


ग) अँधेरा होते-होते चौदह घंटों बाद कूजन-कुंज का दिन ख़त्म हो जाता है।


(संयुक्त वाक्य में बदलिए)

क) सावन भादों में दर्जिन की आवाजें पूरे इलाके में गूंजती हैं|

ख) भुजंगा जब शाम को तार पर बैठता है तब पतिंगों को पकड़ता है|


ग) चौदह घंटे के बाद अंधेरा होता है और कूजन-कुञ्ज का दिन खत्म हो जाता है|


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अपनी दादी की चित्र-प्रदर्शनी पर अपनी प्रतिक्रिया लिखते हुए उन्हें बधाई-पत्र लिखिए।

अथवा


अपनी योग्यताओं का विवरण देते हुए प्राथमिक शिक्षक के पद के लिए अपने जिले के शिक्षा-अधिकारी को आवेदन पर लिखिए।

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निम्नलिखित गद्यांश का शीर्षक लिखकर एक-तिहाई शब्दों में सार लिखिएः

ऐसा कोई दिन आ सकता जबकि मनुष्य के नाखूनों का बढ़ना बंद हो जाएगा। प्रणिशास्त्रियों का ऐसा अनुमान है कि मनुष्य क यह अनावश्यक अंग उसी प्रकार झ़ड़ जाएगा, जिस प्रकार उसकी पूँछ झड़ गई है। उस दिन मनुष्य की पशुत भी लुप्त हो जाएगी। शायद उस दिन वह मारणास्त्रों का प्रयोग भी बंद कर देगा। तब तक इस बात सेछोटे बच्चों को परिचित करा देना वांछनीय जान पड़ता है कि ऩाखून का बढ़ना मनुष्य के भीतर की पशुता की निशानी है और उसे नहीं बढ़ने देना मनुष्य की अपनी इच्छा है, अपना आदर्श है। बृहतर जीवन में अस्त्र-शस्त्रों को बढ़ने देना मनुष्य की पशुता की निशानी है और उनकी बाढ को रोकना मनुष्यत्व का तक़ाजा। मनुष्य में जो घृणा है, जो अनायास-बिना सिखाए-आ जाती है, वह पशुत्व का घोतक है और अपने को संयत रखना, दूसरों के मनोभावों का आतर करना मनुष्य का स्वधर्म है। बच्चे यह जानें तो अच्छा हो कि अभ्यास और तप से प्राप्त वस्तुएँ मनुष्य की महिमा को सूचित करती हैं।

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निर्दैशानुसार वाच्य परिवर्तित कीजिए-

क) श्यामा सुबह-दोपहर के राग बखूबी गाती हैं। (कर्मवाचय में)


ख) पक्षियों द्वारा संगती का अभ्यास किया जाता है। (कर्तवाच्य में)


ग) दर्द के कारण उससे चला नहीं जाता । (कर्तवाच्य में)


घ) चोट के कारण वह बैठ नहीं सकती । (भाववाच्य)

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निम्नलिखित रेखांकित पदों का पद-परिचय दीजिए-

आज विज्ञान व परमाणु-युग में सबसे नाज़ुक प्रश्न शांति ही है।