निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए-
कार्य-थल को वे कभी नहीं पूछते- वह है कहाँ
कर दिखाते हैं असंभव को वही संभव यहाँ।
उलझनें आकर उन्हें पड़ती हैं जितनी ही जहाँ,
वे दिखाते हैं नया उत्साह उतना ही वहाँ।
जो रुकावट डालकर होवे कोई पर्वत खड़ा,
तो उसे देते हैं अपनी युक्तियों से वे उड़ा।
वन खंगालेंगे, करेंगे व्योम में बाजीगरी,
कुछ अजब धुन काम करने की उनमें है भरी।
सब तरह से आज जितने देश हैं फूले-फले,
बुद्धि, विद्या, धन, वैभव के हैं जहाँ डेरे डले।
वे बनाने से उन्हीं के बन गए इतने भले,
वे सभी हैं हाथ से ऐसे सपूतों के पले।
लोग जब ऐसे समय पाकर जनम लेंगे कभी
देश की औ जाति की होगी भलाई भी तभी।
क) कर्मवीरों की दो विशेषताएँ बताइए।
ख) कैसे कह सकते हैं कि कर्मवीर मनुष्य में काम करने की अजब धुन होती है?
ग) किसी देश के नागरिक कर्मवीर हों तो देश को क्या लाभ होता है?
OR
हम जब होंगे बड़े, घृणा का नाम मिटाकर लेंगे दम।
हिंसा के विषयम प्रवाह में, कब तक और बहेगा देश!
जब हम होंगे बड़े, देखना नहीं रहेगा यह परिवेश!
भ्रष्टाचार जमाखोरी की, आदत बहुत पुरानी है,
ये कुरीतियाँ मिटा हमें तो, नई चेतना लानी है।
एक घरौंदे जैसा आखिर, कितना और ढहेगा देश,
जब हम होंगे बड़े देखना, ऐसा नहीं रहेगा देश!
इसकी बागडोर हाथों में, ज़रा हमारे आने दो,
थोड़ा-सा बस पाँव हमारा, जीवन में टिक जाने दो।
हम खाते हैं शपथ, दुर्दशा कोई नहीं सहेगा देश
घोर अभावों की ज्वाला में, कल से नहीं ढहेगा देश।
क) कविता में बच्चा अपने बड़े होने पर क्या-क्या परिवर्तन करने का इच्छुक है? दो का उल्लेख दीजिए।
ख) हमारे समाज और परिवेश में क्या-क्या बुराइयाँ आ गई हैं?
ग) कवि क्या शपथ खाता है और क्यों?