‘कर चले हम फिदा...’ कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।
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कविता की पृष्ठभूमि में तोप की अतीत में भूमिका और उसकी वर्तमान स्थिति का वर्णन कीजिए। कवि को क्यों कहना पड़ा-
‘कितनी कही कड़ी हो तोप
एक दिन तो होना ही है उसका मुख बंद।’
अपना जीवन सबको प्यारा होता है और प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन को सुरक्षित एवं संरक्षित बनाए रखने के लिए अनेकों प्रयास करता है| लेकिन सैनिक का जीवन इससे अलग होता है| वह अपने देश के सम्मान और रक्षा के लिए अनेकों चुनौतियों को स्वीकार करके अपने जीवन का बलिदान करने के लिए तैयार रहता है| अपनी अंतिम सांस तक देश के मान-सम्मान की रक्षा कर उसे शत्रुओं से बचाता है| कवि इस कविता के माध्यम से एक सैनिक की देशभक्ति के बारे में बताकर आम लोगों में देशभक्ति की भावना को भरना चाहता है ताकि राष्ट्र के निर्माण एवं सुरक्षा में वे भी अपना सम्पूर्ण योगदान दे सकें|
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अतीत में तोप बहुत शक्तिशाली हुआ करती थी। इस तोप ने बड़े-बड़े सूरमाओं को धूल में मिला दिया था। अनेकों लड़ाइयों में इस तोप ने गोले बरसाए थे| लेकिन अब तोप का अहंकार खत्म हो गया है। आज तोप केवल पर्यटकों को दिखाने, बच्चों के खेलने और चिड़ियाओं की गप-शप का माध्यम बन गई है। अर्थात एक दिन अहंकार और ताकत का अंत अवश्य होता है। इसलिए अपनी शक्ति पर कभी अहंकार नहीं करना चाहिए।
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