निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
क) बड़े भाईसाहब को अपने मन की इच्छाएँ क्यों दबानी पड़ती थीं?
ख) बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा है? ‘अब कहाँ दूसरों के दुख से दुखी होने वाले’ पाठ के आधार पर लिखिए।
ग) ‘गिन्नी का सोना’ पाठ में शुद्ध आदर्श की तुलना शुद्ध सोने से क्यों की गई है?
OR
जापान में चाय पीना एक ‘सेरेमनी’ क्यों है?
(क) बड़े भाई की उम्र छोटे भाई से पांच साल ज्यादा थी। वह छोटे भाई के अभिभावक के रूप थे। वह अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखते थे। उन्हें भी खेलने पतंग उड़ाने और तमाशे देखने का शौक था। लेकिन अगर वे ठीक रास्ते पर नहीं चलते और छोटे भाई के सामने आदर्श प्रस्तुत नहीं करते तो भाई के प्रति अपनी जिम्मेदारी कैसे निभाते। इसी कारण से वे अपने नैतिक कर्त्वयों को याद कर अपने मन की इच्छाएं दबा लेते थे ताकि उनका छोटा भाई ठीक तरीके से पढ़ाई लिखाई कर सफल हो सके|
(ख) पर्यावरण असंतुलित होने का सबसे बड़ा कारण आबादी का बढ़ना है। जिससे आवासीय स्थलों को बढ़ाने के लिए वन, जंगल यहां तक कि समुद्रों को भी छोटा किया जा रहा है। पशु-पक्षियों के लिए स्थान नहीं है। इन सब वजहों से प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है। समय-समय पर प्राकृति आपदाएं आ रही हैं। कहीं भूकंप, कहीं बाढ़ तो कहीं तेज बारिश के कारण कई बीमारियां हो रही हैं। इस तरह पर्यावरण के असंतुलन का जन-जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है।
(ग) शुद्ध सोने में किसी तरह की मिलावट नहीं की जा सकती। तांबा मिलाने से सोना मजबूत बन जाता है लेकिन इससे सोने की शुद्धता खत्म हो जाती है। इसी प्रकार व्यावहारिकता में शुद्ध आदर्श समाप्त हो जाते हैं। लेकिन अगर अगर आदर्शों में सही मात्रा में व्यावहारिकता को मिलाया जाए तो वह सोने में तांबे के समान कार्य करता है| सोने में तांबे के मिलने से सोने की मजबूती और सुन्दरता बढ़ती है उसी प्रकार आदर्शों में व्यावहारिकता मिलने से हमारा जीवन बेहतर हो जाता है|
OR
जापानी लोग काम में बहुत व्यस्त रहते हैं और इस व्यस्तता के कारण वे अपने लिए वक्त नहीं निकाल पाते| इसी व्यस्तता के चलते उन्हें तनाव हो जाता है| इस तनाव को दूर करने के लिए वे एक विशेष स्थान(पर्णकुटी) पर चाय पीने जाते हैं| वहां पर सिर्फ तीन ही लोगों को प्रवेश दिया जाता है और वहाँ पर बहुत शान्ति होती है| लोगों का वहाँ जाने के मूल उद्देश शान्ति से वक्त बिताना होता है| चाय पीने की इस विधि को “चा-नो-यू” कहा जाता है और जापानी लोगों के जीवन में इस विधि के महत्त्व के कारण इसे एक सेरेमनी की संज्ञा दी जाती है|
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