‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने सबको एक साथ होकर चलने की प्रेरणा क्यों दी है? इससे समाज को क्या लाभ हो सकता है? स्पष्ट कीजिए।
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‘आत्मत्राण’ कविता में कवि की प्रार्थना से क्या संदेश मिलता है? अपने शब्दों में लिखिए।
प्रकृति में मौजूद अन्य प्राणियों की तुलना में मनुष्यों में चेतना ज्यादा होती है। 'मनुष्यता' कविता के माध्यम से कवि दया, प्रेम, परोपकार और मानवता से जीने का संदेश देता है। मनुष्य दूसरों के हित का ख्याल रख सकते हैं, एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं| इस कविता का सार है कि हमें मृत्यु से नहीं डरना चाहिए और परोपकार के लिए अपना सबकुछ न्यौछावर कर देना चाहिए। इसके साथ ही औरों को आगे आने का मौका देना चाहिए। सबके कल्याण में ही हमारा कल्याण है|
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'आत्मत्राण' कविता रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा लिखी गई कविता है। इस कविता में कवि मुनुष्य को भगवान के प्रति विश्वास बनाए रखने का संदेश देता है। वह भगवान से प्रार्थना करता है कि चाहे जितना बुरा समय हो कितनी भी परेशानियां हो, मेरी भगवान में आस्था बनी रहनी चाहिए। कवि कहता है कि जीवन में थोड़ी सी तकलीफ आते ही भगवान पर से विश्वास हटने लगता है। ऐसे समय में आपको अपने मन में भगवान के प्रति विश्वास बनाए रखना चाहिए| कठिन परिस्थितियों में भगवान पर आपका विश्वास कमजोर नहीं पड़ना चाहिए|
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