परम्पराएँ या मान्यताएँ जब बंधन लगने लगें तो उनका टूट जाना ही क्यों अच्छा है?
‘तताँरा-वामीरो’ ने इसके लिए क्या त्याग किया?
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‘कारतूस’ पाठ के आधार पर वज़ीर अली की चारित्रिक विशेषताओं का उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।
परम्पराएँ या मान्यताएँ जब बंधन लगने लगें तो उनका टूट जाना ही अच्छा है। ऐसा इसलिए क्योंकि ऐसी परम्पराएं एवं मान्यताएं हमें बंधनों में जकड़ लेती हैं और वे हमारे लिए परेशानी का सबब बन जाती हैं| इससे व्यक्ति का विकास होना बंद हो जाता है। इससे बेहतर है की ऐसी परम्पराएं अथवा मान्यताएं टूट जाएं| अगर ऐसा नहीं हुआ तो यह प्रगति के मार्ग में बाधा बनी रहेगी और व्यक्ति स्वतंत्रतापूर्वक जीवन नहीं जी पायेगा|
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कारतूस पाठ के आधार पर वजीर अली के चरित्र की प्रमुख विशेषताएं निम्न हैं-
1. वजीर अली एक सच्चा देशभक्त था| वह हिंदुस्तान को गुलाम बनाने वाले अंग्रेजों से नफरत करता था| वह किसी भी तरह से अंग्रेजों को हिंदुस्तान से बाहर निकालना चाहता है।
2. वजीर अली साहसी और वीर भी था। दुश्मन भी उसकी वीरता का लोहा मानते थे| वह सीधा दुश्मन के खेमे में जाकर उसे ललकारने में यकीन करता था|
3. वजीर अली अच्छा शासक भी था| महज 5 महीने के लिए उसने अवध की बागडोर संभाली। इस दौरान उसने अपनी रियासत को अंग्रेजों से मुक्त भी करवा लिया था|
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